पूर्व पीएम वाजपेयी के भतीजे और स्थानीय निवासी राकेश वाजपेयी
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बहुत धीमी गति से हो रहा है काम
अमर उजाला से चर्चा में पूर्व पीएम वाजपेयी के भतीजे और स्थानीय निवासी राकेश वाजपेयी कहते हैं कि सीएम योगी सितंबर 2018 को अटलजी की अस्थियां विसर्जन करने आए थे, उस दौरान हमने उनसे कन्या महाविद्यालय, वाजपेयी जन्म स्थान बनाने, बाह को जिला और बटेश्वर को तहसील बनाने की मांग की थी। इसके अलावा पीएम रहते हुए जब अटलजी ने 1996 में जो रेल लाइन की उद्घाटन किया उसी लाइन पर एक स्टेशन बनाने की मांग की थी ताकि क्षेत्र में रोजगार बढ़ सके। इसके अलावा पर्यटन के मद्देनजर बटेश्वर महादेव मंदिर और घाटों के जीर्णोद्धार की मांग रखी थी। कुछ घाटों के काम तो शुरू कर दिए हैं। वहीं अटल सांस्कृतिक संकुल केंद्र और कन्या महाविद्यालय काम भी शुरू कर दिया है, लेकिन इसकी गति बहुत धीमी नजर आ रही है।
बटेश्वर दिवंगत पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी का पैतृक गांव रहा है। वाजपेयी ने भारत छोड़ो आंदोलन में इसी गांव से भाग लिया था और यहीं से वह और उनके भाई गिरफ्तार किये गए थे। इस तरह इस गांव से उनके राजनीतिक जीवन का प्रारंभ हुआ। दूसरे यमुना नदी के तट पर 101 शिव मंदिरों के कारण इसे 'मिनी-काशी' के नाम से भी जाना जाता है। तीसरी सबसे बड़ी खासियत यह है कि बिहार के सोनपुर के पशु मेले के बाद दूसरा सबसे बड़ा पशु मेला यहां लगा करता है।
हमेशा रहता है राजघराने का वर्चस्व
यूपी की सियासत में कोई भी आए या जाए, लेकिन आगरा के बाह विधानसभा क्षेत्र में राजघराने का वर्चस्व रहा है। पिछले 17 चुनावों में यहां 11 बार भदावर घराने का ही सदस्य विधायक चुना गया। एक बार फिर भाजपा ने इस सीट से रानी पक्षालिका सिंह को प्रत्याशी बनाया है। सपा-रालोद गठबंधन से मधुसूदन शर्मा उम्मीदवार हैं। जबकि कांग्रेस ने महिला प्रत्याशी मनोज दीक्षित और बसपा ने निषाद समाज के नए चेहरे नितिन वर्मा को चुनाव मैदान में उतारा है। क्षत्रिय, ब्राह्मण और निषाद (मल्लाह) बहुल इस क्षेत्र में फिर विपक्षी दल राजघराने की घेराबंदी में जुटे हैं।
1962 में पहली बार इस सीट पर भदावर घराने का परचम लहराया। तब महेंद्र रिपुदमन सिंह यहां से निर्दलीय लड़े और जीते। उसके बाद से 11 बार चुनावों में राजघराने का ही कोई सदस्य यहां झंडा बुलंद करता रहा। बाह का ज्यादातर क्षेत्र चंबल के बीहड़ में आता है। 2007 में बसपा से उतरे मधुसूदन शर्मा ने राजघराने के वर्चस्व को तोड़ा था। महेंद्र अरिदमन सिंह को हराकर मधुसूदन ने बड़ा उलटफेर किया था। लेकिन पांच साल बाद ही फिर यह सीट राजघराने के कब्जे में चली गई। 2012 में अरिदमन ने सपा के टिकट पर यहां वापसी की। राज्य में कैबिनेट मंत्री बने। 2017 के चुनाव में राजा की जगह रानी पक्षालिका सिंह भाजपा से विधायक बनीं। इस बार सपा-रालोद गठबंधन से मधुसूदन शर्मा के उतरने से यहां मुकाबला दिलचस्प हो गया।