इसके अलावा इस बैठक में राज्यपाल कोटे से मनोनीत होने वाले एमएलसी के नामों पर भी चर्चा की गई। मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही एमएलसी मनोनयन की प्रक्रिया भी अभी तक रूकी है। एमएलसी के लिए जिन लोगों की उम्मीदवारी सबसे मजबूत मानी जा रही है उसमें निषाद पार्टी के संजय निषाद, जितिन प्रसाद, लक्ष्मीकांत बाजपेयी और अति पिछड़ी जाति से भी एक व्यक्ति को शामिल किया जा सकता है। इनमें से एक या दो को मंत्रिमंडल में भी शामिल किया जा सकता है। सत्ताधारी भाजपा राज्य में पिछड़ों और ब्राह्मणों को साधने की रणनीति अपना सकती है, क्योंकि विपक्ष इन्हीं दोनों पर घेरने में जुटा है।
उत्तर प्रदेश सरकार में अभी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कुल 53 मंत्री हैं। इनमें 23 कैबिनेट, नौ राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 21 राज्यमंत्री हैं। राज्य में अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते है। फिल्हाल सात और मंत्री बनाए जाने की गुंजाइश कैबिनेट में है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसके लिए समाजवादी पार्टी, बसपा, कांग्रेस समेत कई दल मैदान में हैं। प्रदेश चुनाव में पहली बार ओवैसी की पार्टी भी चुनाव लड़ेगी। ऐसे में भाजपा सरकार और संगठन, दोनों ही जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाने की नीति-रणनीति पर काम कर रहे हैं।