इटावा, उत्तर प्रदेश चुनाव 2022
- फोटो : अमर उजाला
पूनम ने कहा कि पहले बेटियां स्कूल, कॉलेज या रोजगार के लिए निकलतते समय डरती थीं। हमेशा भय का माहौल हुआ करता था। अब हर कोई सुरक्षित महसूस करता है। महिलाएं स्वयं सहायता समूह के जरिए स्वालंबी बन रहीं हैं।
शिक्षिका डॉ. ज्योति वर्मा ने महिलाएं तभी पूरी तरह से सुरक्षित होंगी जब समाज की सोच बदलेगी। बेटों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने की जरूरत है। अगर हम समाज में नैतिकता नहीं ला सकते हैं तो हम सरकार को दोष भी नहीं दे सकते हैं। डॉ. वर्मा ने आगे किहा कि पहले के मुकाबले महिलाएं काफी सुरक्षित महसूस करती हैं। खुद का उदाहरण दिया। बोलीं, पहले मैं मूल्यांकन करने झांसी जाती थी, लेकिन वहां से वापसी में मुझे डर लगता था। मैं ट्रेन से नहीं आती थी, क्योंकि रात में लूट-पाट होती थी। आज मैं स्वतंत्र होकर रात में 10-12 बजे आ सकती हूं।
संगीता अग्रवाल ने कहा कि पहले के मुकाबले महिलाओं की स्थिति काफी बेहतर हुई है। हर सरकार में कमियां जरूर होती हैं। कभी भी कमियों को पूरा करना संभव नहीं है। महिलाएं कभी भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं हो सकती हैं। हालांकि, पहले के मुकाबले काफी सुधार आया है। अब अपराधिक घटनाएं काफी कम हो गए हैं।
क्षमा दीक्षित ने कहा कि चुनाव के वक्त हर नेता जनता से वादे करता है। ये लोकलुभावन वादे होते हैं। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अभी काफी काम करने की जरूरत है। हर स्कूल के सामने महिला पुलिस की ड्यूटी होनी चाहिए। बाजार के अंदर जो घटनाएं घटती हैं वो नहीं होनी चाहिए।
पूनम अग्रवाल ने कहा कि अभी एक बच्ची पर तेजाब फेंका गया था। इसी तरह की एक और घटना हुई थी। महिलाओं और बच्चियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए। पुलिस वाले ध्यान नहीं देते हैं।
कनक श्यामलता ने कहा कि पहले आपराधिक मामले बहुत ज्यादा होती थी। अब काफी सुधार हुआ है। सड़कें भी पहले के मुकाबले बेहतर हुई हैं। आकांक्षा गुप्ता ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था पहले के मुकाबले काफी बेहतर हुई है, हालांकि इसमें अभी काफी सुधार की गुंजाइश है।
प्रमिला पालिवाल ने कहा कि हर समस्या का 100 प्रतिशत समाधान नहीं हो सकता है। कुछ न कुछ कमियां हर घर में होती हैं। मौजूदा सरकार ने बहुत कुछ किया है। आज सरकार ने सारी योजनाएं महिलाओं को ध्यान में रखते हुए बनाई है। जब तक मातृ शक्ति शक्तिशाली नहीं होगा, तब तक समाज शक्तिशाली नहीं होगा।
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वीनत सिंह सेंगर ने कहा महिला सुरक्षा को लेकर जो मानसिकता है लोगों की उसे बदलने की जरूरत है। मानसिक गुलामी जो हमारे चारों तरफ फैली है उसे तोड़ने की जरूरत है। सरकार बहुत कुछ कर रही है, लेकिन फिर भी हम बाहर निकलकर कुछ नहीं बोलते हैं। अभी भी पितृ सत्ता की मानसिकता बनी हुई है। समाज में बदलाव की जरूरत है।
एक स्कूल की प्रिंसिपल ने कहा कि स्त्री स्वयं से सक्षम होनी चाहिए कि वह हर चीज का मुकाबला कर सके। चार साल पहले जब मैं यहां से आगरा आई तो मुझे बहुत खराब लगा। लेकिन अब काफी हालात में सुधार है।
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