नौ की लकड़ी, नब्बे खर्च। यह कहावत यूपी सरकार पर बिल्कुल फिट बैठती है। प्रदेश सरकार ने 8.5 करोड़ बेरोजगारी भत्ता बांटने के लिए 12.5 करोड़ रुपये आयोजन पर खर्च कर डाले। मार्च में सरकार बनने के बाद से नवंबर 2012 के बीच यह धनराशि केवल बेरोजगारी भत्ता बांटने के आयोजन पर खर्च की गई है। यह खुलासा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में हुआ है।
राजाजीपुरम निवासी आरटीआई कार्यकर्ता उर्वशी शर्मा ने मुख्य सचिव कार्यालय से 15 मार्च 2012 से 14 नवंबर तक बेरोजगारी भत्ता के तहत बांटी गई धनराशि का ब्योरा मांगा था। जवाब 14 फरवरी को प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय के उप निदेशक डी. प्रसाद ने बताया कि बेरोजगारी भत्ते पर 8 करोड़ 54 लाख 35 हजार धनराशि व्यय की गई। जबकि मुख्यमंत्री अखिलेश द्वारा बेरोजगारी भत्ते के वितरण के आयोजनों पर 12 करोड़ 49 लाख 38 हजार से ज्यादा खर्च किए गए।
9 मार्च, 2013 तक करीब 420.95 करोड़ की धनराशि का वितरण किया गया है। अभी तक बेरोजगारी भत्ते के लिए 12 लाख 34 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं, इनमें से 11 लाख 74 हजार 64 लोगों का भुगतान स्वीकृत हुआ है। सरकार ने बेरोजगारी भत्ता वितरण योजना के तहत 25-40 वर्ष तक के हर युवा को 1000 रुपये प्रति माह वितरित करने का फैसला किया था।
उन्होंने पहले ही सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए थे, जो सही साबित हुआ है। अब इसका खुलासा भी हो गया है कि 12 करोड़ 49 लाख 38 हजार रुपये बेरोजगारी भत्ता बांटने वाले समारोहों पर सरकार ने खर्च कर दिए जबकि इसी अवधि मे कुल 8 करोड़ 54 लाख 35 हजार बेरोजगारों को भत्ते के रूप में दिये। स्पष्ट है कि सरकार की रुचि भव्य समारोह आयोजित करने में ज्यादा रही।
-विजय बहादुर पाठक, भाजपा प्रवक्ता
जितना पैसा दिखावे पर खर्च किया गया है, उससे कई बेरोजगारों का भला हो जाता। पर सरकार का ध्यान दिखावे पर ज्यादा है।
-अमरनाथ अग्रवाल, कांग्रेस प्रवक्ता