हनुमान गढ़ी आश्रम नवाबगंज में घोड़ों और कार की रेस में कानपुर के ठाकुर कोतवाल सिंह का घोड़ा राजा ने रेस में बाजी मार ली। कानपुर के मनोज मिश्रा की कार दूसरे व बंथरा के विनोद सिंह का घोड़ा तीसरे स्थान पर रहा।
हनुमान गढ़ी आश्रम नवाबगंज से अतरसा तक हुई रेस प्रतियोगिता में राजा नाम के घोड़े ने रेस जीती। प्रतियोगिता में आश्रम के महंत रमेश स्वरूप ब्रह्मचारी ने घोड़े के महत्व पर प्रकाश डाला और उन्होंने बताया कि शक्ति संपन्न देश भारत में शक्ति का पैमाना बनाया गया।
उस तराजू पर घोड़े की शक्ति को स्थायी शक्ति के रूप में माना गया। मशीनरी युग में घोड़े के बल के पैमाने के आधार पर मशीनों में हार्सपावर बनाया गया।
पौराणिक मतानुसार देवासुर संग्राम में भगवान विष्णु घोड़े का मुख धारण करके ह्यग्रीव अवतार लेकर राक्षसों का विनाश किया। ऋषिकुल परंपरा के आधार पर अश्वासिला नाम के एक महान तपस्वी का नाम जाना जाता है। जिनका सिर घोड़े का था। औषधियों की दुनिया में भगवान सूर्यदेव ने घोड़े का रूप धारण करके अपनी पत्नी संज्ञा को देखा।
जिससे श्रेष्ठ चिकित्सकों के रूप में अश्वनी कुमारों का जन्म हुआ। भारतीय रक्षा दल में भी घोड़े का विशेष महत्व माना गया है। घोड़े में देवता और संत की शक्ति की समाहित होती है। इसीलिए इसकी शक्ति सराहनीय मानी गई है। देश की लड़ाई में इतिहास गवाह है। महाराणा प्रताप का घोड़ा एवं महारानी लक्ष्मीबाई का घोड़ा आदि अनेक प्रमाण मिलते हैं।
देश में आज महत्व देना जरूरी हो गया है। घोड़ा सवार सैनिक की ऐसी अवस्था में देश की रक्षा में लगाए जाते हैं। घोड़ा बल प्रधान ही नहीं बल्कि बुद्धि और भाव प्रधान भी होता है। माता जानकी के त्यागने के समय लक्ष्मण रथ से वापस चलते हैं। घोड़े मुड़-मुड़कर मां जानकी की ओर देखकर आंसू बहाते हैं।