उन्नाव। छह मार्च से शुरू होने वाली परिषदीय विद्यालयों की वार्षिक परीक्षाएं पिछले वर्ष की तरह ही कराई जाएंगी। बजट का अभाव होने के कारण छात्र-छात्राओं को न तो उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और न ही पेपर। उन्हें घर से ही कापियां लानी होंगी और टीचर ब्लैक बोर्ड पर प्रश्न लिखेंगे।
परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई पर शासन करोड़ों रुपये खर्च करती है। लेकिन जब परीक्षा का समय आया तो बजट का रोना रोया जा रहा है। उन्हें उत्तर पुस्तिकाएं व पेपर तक नहीं उपलब्ध कराए जा रहे हैं। लगभग चार वर्षों से शासन के पास परिषदीय विद्यालयों की वार्षिक परीक्षा कराने के लिए बजट नहीं है।
बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की माने तो वार्षिक परीक्षा कराने में प्रतिवर्ष साढ़े तीन लाख रुपये का खर्च आता है। उसमें 50 पैसे टीचर को कापी चेक करने के भी मिलते हैं। यदि इस खर्चे को हटा दिया जाए तो परीक्षा कराने में मात्र डेढ़ लाख रुपये का खर्च आएगा, लेकिन ऐसा नहीं होता है। बच्चों को उनका परिणाम अपने भरोसे ही सहेजना पड़ता है।
इस संबंध में एडी बेसिक महेंद्र सिंह राणा ने बताया कि हमारे परीक्षा खाते में भी इतना धन नहीं है कि परीक्षा में बच्चों को उत्तर पुस्तिकाएं व पेपर उपलब्ध कराए जा सकें। लगभग चार सालों से तो परीक्षा कराने का कोई बजट ही नहीं मिला। इसलिए पिछले वर्ष की तरह ही परीक्षा कराना मजबूरी है।