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Unnao News: पानी तो मिला नहीं, सड़कें भी चलने लायक नहीं रहीं

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फोटो- 4- भूमिगत पाइन लाइने के बाद नहीं कराई गई पन्ना लाल पार्क व मोहल्ले को जाने वाले मार्ग की 
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उन्नाव। शहर में निर्माणाधीन 264 करोड़ की अटल मिशन आफ रेजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफोर्मेशन (अमृत) योजना तय समय के छह साल भी पूरा नहीं हो पाई। इस कारण न तो शहरवासियों को शुद्ध पानी मिला और न ही सड़कें भी चलने लायक बचीं। नगर पालिका अध्यक्ष ने लखनऊ में मुख्यमंत्री से मिलकर इसकी जानकारी दी। उन्होंने उन्नाव शहर में खराब पड़ी 183 सड़कों को बनवाने के लिए दस करोड़ रुपये की जरूरत बताई। पालिका अध्यक्ष के अनुसार मुख्यमंत्री ने बजट दिलाने का आश्वासन दिया है।
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शहर के 32 वार्डों के 30,298 घरों में नल से शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए वर्ष 2018 में 264 करोड़ की अमृत योजना मंजूर हुई थी। इस योजना से गंगा के पानी को वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में साफ कर हर घर आपूर्ति करनी है। योजना को 2020 तक पूरा करना था लेकिन बार-बार समय सीमा बढ़ती रही।
योजना में जल निगम ने शहर में 175 किलोमीटर भूमिगत पाइप लाइन बिछाई। इसके लिए मुख्य मार्गों से लेकर गली मोहल्लों तक की 322 सड़कें खोदीं लेकिन सड़कों की मरम्मत कराने में लापरवाही बरती। नगर पालिका ने कई नोटिस भेजे तो जलनिगम ने फौरी मरम्मत कराकर जिम्मेदारी पूरी कर दी। नगर पालिका के अनुसार अभी भी 183 सड़कें खराब हैं।
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नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता मिश्रा ने बुधवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। उन्हें बताया कि तय समय सीमा बीतने के छह साल बाद भी शहर के लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पाया, बनी बनाई सड़कें भी खराब हो गईं। बताया कि मुख्यमंत्री से शहर की सड़कों की मरम्मत कराने के लिए दस करोड़ रुपये की जरूरत बताई। इस पर उन्होंने बजट का आश्वासन दिया।


सड़कों की मरम्मत न कराने और देरी पर लगा 12.40 करोड़ जुर्माना
अमृत योजना में देरी और गड़बड़ी पर जल निगम ने निर्माण एजेंसी पर तीन बार भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया है। सितंबर 2024 को योजना में लेटलतीफी पर 5.90 करोड़ रुपये जुर्माना लगा। इससे पहले खोदी गई सड़कों की मरम्मत न कराने और जिला प्रशासन को गलत रिपोर्ट देने पर जून 2023 में एक करोड़ रुपये और लेटलतीफी पर 21 नवंबर 2023 को 5.50 करोड़ रुपये जुर्माना लग चुका है।


ये है अमृत योजना

अमृत योजना पर 264 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। गंगा बैराज के पास नदी में इंटेक वेल, 80 एमएलडी क्षमता का डब्ल्यूटीपी (वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट) के अलावा 14 ओवरहेड टैंक (पानी की टंकियां) और 14 अंडर ग्राउंड टैंक (भूमिगत टैंक) बनाए गए हैं। पहले चरण में शहर के दस जोन में 3,292 घरों में कनेक्शन देकर फरवरी 2020 में जलापूर्ति शुरू करना था लेकिन जलनिगम के अधिकारी अभी भी दो महीने और लगने की बात कह रहे हैं।

बोले जिम्मेदार
भूमिगत पाइप लाइनें बिछाने में निर्माण एजेंसी ने खोदी गई सड़कों की ठीक से मरम्मत नहीं कराई। इससे समस्या हो रही है। पालिका के पास इतना बजट नही है कि इतनी सड़कें बनाई जा सकें। इसीलिए मुख्यमंत्री को समस्या बताई और दस करोड़ रुपये की मांग की है। पाइप लाइनों में लीकेज की समस्या भी है। जलनिगम दो-चार महीने निर्बाध जलापूर्ति करके दिखाए, इसके बाद इस पेयजल परियोजना की जिम्मेदारी लेंगे। -श्वेता मिश्रा, नगर पालिका अध्यक्ष।


जो भी सड़कें खोदी जाती हैं। पाइप लाइन डालने के बाद तत्काल मरम्मत कराई जाती है। नगर पालिका के कहने पर कई सीसी सड़कें बनाकर दी हैं। कोई भी ऐसी सड़क नहीं है जिसकी मरम्मत न कराई गई हो। शहर के दस में सात जोन का काम पूरा हो चुका है। हर रोज टेस्टिंग की जा रही है। जहां भी समस्या आती है, ठीक कराया जाता है। है। बाकी बचे तीन जोन में चल रही टेस्टिंग भी जल्द पूरी हो जाएगी।-पंकज रंजन झा, एक्सईएन जल निगम।

फोटो- 4- भूमिगत पाइन लाइने के बाद नहीं कराई गई पन्ना लाल पार्क व मोहल्ले को जाने वाले मार्ग की 

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