फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पहुंचे पूर्व डीपीआरओ, नहीं मिले डीएम, सीडीओ

विज्ञापन
विज्ञापन
उन्नाव। करोड़ों के गड़बड़झाले में अपना पक्ष रखने पहुंचे पूर्व डीपीआरओ की डीएम व सीडीओ से मुलाकात नहीं हो सकी। वहीं, पूर्व डीपीआरओ करोड़ों के गोलमाल के आरोप को गलत बता रहे हैं।
विज्ञापन

वित्तीय वर्ष 2019-20 में आइईसी (सूचना शिक्षा संचार) मद, प्रशासनिक व शौचालय व्यय में 16.67 करोड़ खर्च किए जाने की सीए द्वारा तैयार की ऑडिट रिपोर्ट व उपयोगिता प्रमाणपत्र पूर्व डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद यादव ने डीएम के सामने प्रस्तुत किया था। डीएम ने इस पर आइईसी मद में किस कार्य पर कब, कब व्यय हुआ इसका विवरण मांगा था। इसके अलावा प्रशासनिक (संविदा कार्मिकों का मानदेय, वाहन में ईंधन) व शौचालय व्यय में मदवार खर्च और उपयोगिता प्रमाणपत्र एडीओ पंचायत व बीडीओ के माध्यम से प्राप्त कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। राजेंद्र प्रसाद पर आरोप है कि डीपीआरओ ने इस सबंध में कोई विवरण प्रस्तुत नहीं किया। वहीं, मात्र पंचायत सचिव के हस्ताक्षर वाले उपभोग प्रमाणपत्र तैयार कराएं। यही नहीं डीपीआरओ ने प्रधान तक के हस्ताक्षर नहीं कराए। डीएम ने इसे वित्तीय अनियमितता माना और उनके निलंबन के लिए पत्र अपर मुख्य सचिव को भेज दिया। शुक्रवार शाम को राजेंद्र प्रसाद, डीएम व सीडीओ से मिलने पहुंचे लेकिन बैठक होने से दोनों अधिकारियों से मुलाकात नहीं हो सकी।
वहीं, पूर्व डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद ने घपले के आरोप को नकारते हुए कहा कि कहीं कोई गड़बड़ी नहीं की गई। उनके पास हर अभिलेख मौजूद है। शौचालय व्यय में जो धनराशि खर्च की गई है उसमें शौचालय बनवाए गए हैं। शौचालय गांवों में बने हैं। प्रचार, प्रसार मद में सिर्फ गंगा यात्रा के दौरान एक से डेढ़ लाख खर्च हुए थे। उसके भी अभिलेख हैं। बताया कि उपभोग प्रमाणपत्र, उन्होंने सीडीओ के हस्ताक्षर कराकर भेजे थे। कभी, कभार शासन से तुरंत रिपोर्ट मांगी जाती है।
विज्ञापन

एसीएस ने पूर्व डीपीआरओ को दिया है चार्ज, प्रशासन ने पीडी को
जिला पंचायतराज अधिकारी के चार्ज को लेकर काफी रस्साकशी मची हुई है। वर्तमान डीपीआरओ गिरीशचंद्र साहू 19 अगस्त से मेडिकल अवकाश पर हैं। उनकी अनुपस्थिति में अपर मुख्य सचिव पंचायतीराज मनोज कुमार ने पूर्व डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद को ही चार्ज देने का आदेश 31 अगस्त को जारी किया था। उधर, डीएम ने एक सितंबर को राजेंद्र प्रसाद को निलंबित करने के लिए अपर मुख्य सचिव को पत्र भेज दिया। जिला प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक यशवंत सिंह को चार्ज दे रखा है।
मथुरा में परफॉर्मेंस ग्रांट पर हो चुकी है एफआईआर, कोर्ट से स्टे
राजेंद्र प्रसाद यादव ने वर्ष 2016-17 में मथुरा में तैनाती के दौरान 77 ग्राम पंचायतों को परफॉर्मेंस ग्रांट दिलाने के लिए आवेदन कराया था। शासन के आदेश पर सतर्कता अधिष्ठान लखनऊ ने जब जांच की थी तो मानक न पूरे करने वाली पंचायतों को भी ग्रांट पाने के लिए चयन किए जाने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद अभिसूचना सेक्टर उप्र सतर्कता अधिष्ठान लखनऊ के दरोगा ने मथुरा के सदर बाजार थाने में राजेंद्र प्रसाद के खिलाफ दिसंबर 19 में रिपोर्ट कराई थी। बाद में शासन ने उन्हें उन्नाव से हटाकर लखनऊ पंचायतीराज कार्यालय में संबद्ध कर दिया था। हालांकि राजेंद्र प्रसाद इसके खिलाफ कोर्ट चले गए। जहां से उन्हें स्टे मिल गया। राजेंद्र के मुताबिक, मथुरा में उनकी तरफ से कोई गड़बड़ी नहीं की गई थी। उन्होंने खुद ही धनराशि वापस कराई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें