उन्नाव। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में नौ लाख से अधिक की धनराशि का खेल हुआ है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में जिन 31 किसानों को पाइप आवंटित किया गया। उनके खाते में अनुदान के रूप में 25 से 35 हजार रुपये पहुंचे। हालांकि जिस फर्म के ठेकेदार ने किसानों के फार्म भरवाए उसने ही योजना का पूरा पैसा जमा किया। फिर जब किसानों के खातों में अनुदान पहुंचा तो उसे निकलवा लिया। किसानों को 5 से 7 हजार ही देकर शेष धनराशि हजम कर गया। फर्म ठेकेदार ने करीब 9 लाख का खेल किया। सूत्रों के मुताबिक, यह तो सिर्फ सरोसी के ही कुछ गांवों की बानगी है। अन्य ब्लॉकों में भी फर्म ठेकेदार ने विभागीय व ब्लॉक अधिकारियों से साठगांठ करके लाखों के वारे-न्यारे किए हैं।
फतेहपुर चौरासी, सफीपुर में भी आवंटित किए गए हैं पाइप
उद्यान विभाग के सूत्रों के मुताबिक, अभी तो यह मामला केवल सिकंदरपुर सरोसी के कुछ ही गांवों में पकड़ में आया है। जबकि रायबरेली की जिस फर्म को पाइप आवंटित करने का ठेका दिया गया है उसने सरोसी के अलावा फतेहपुर चौरासी व सफीपुर में भी पाइप आवंटित किए हैं। सूत्रों का तो यह भी कहना है कि यह फर्म एक ब्लॉकस्तरीय अधिकारी के चालक के परिवारीजन की है। उसने ही पूरे मामले में गड़बड़झाला किया है। ब्लॉकस्तरीय अधिकारी ने भी उसका पूरा साथ दिया है। ऐसे में यदि मामले की गहनता से जांच की जाए तो उद्यान के साथ ब्लॉकस्तरीय कई अधिकारियों, कर्मचारियों और चालक की गर्दन भी फंस सकती है।
यह है प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना संचालित की जा रही है। इसका नोडल उद्यान विभाग को बनाया गया है। योजना के तहत जो भी सिंचाई के लिए पाइप लेने का आवेदन करता है तो उसे खेत के रकबे के हिसाब से पाइप दिए जाते हैं। पाइप खरीदने के लिए किसान को पहले निर्धारित प्रति हेक्टेयर रेट के अनुसार भुगतान करना होता है। फिर सरकार योजना में अनुमन्य 75 से 80 प्रतिशत तक अनुदान किसान के खाते में भेज देती है।