फोटो-19- लीला का मंचन करते कलाकार। संवाद
बीघापुर। धानीखेड़ा गांव में शुक्रवार की रात धनुष भंग लीला का आयोजन किया गया। लक्ष्मण-परशुराम का संवाद सुनकर दर्शक रोमांचित हो गए।
लीला में कलाकारों ने दिखाया कि मिथिला नरेश जनक की ओर से आयोजित सीता स्वयंवर में आए राजाओं ने भगवान शिव का धनुष उठाने की कोशिश की लेकिन हिला भी नहीं पाए। इससे परेशान जनक ने कहा, ‘तजहु आस निज निज गृह जाहू, लिखा न विधि वैदेहि विवाहू।’ इस पर गुरु की आज्ञा पाकर श्रीराम धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाते हैं जिससे धनुष भंग हो जाता है। इसके बाद सीता भगवान श्रीराम को वरमाला पहनाती हैं। इस पर पंडाल सियावर रामचंद्र के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद शुरू हुआ लक्ष्मण-परशुराम संवाद सुबह तक चला।
आचार्य श्रीराम द्विवेदी, पं. सीताराम, गिरधारी गुप्ता, दिलीप प्रधान, मुन्ना बाबू, आनंद द्विवेदी, उमेश शुक्ला, निशाकांत दीक्षित, कुलदीप सिंह, रवींद्र पांडेय, सुधीर मिश्रा, मणिकांत, हितेश पांडेय आदि रहे।