सफीपुर (उन्नाव)। आसीवन थाना क्षेत्र में धोखाधड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। उदसाह गांव के प्रधान ने जीवित व्यक्ति को मृत घोषित करा दिया। इसके बाद उसकी डेढ़ बीघा जमीन फर्जी तरीके से बेच दी। पीड़ित शिवचरन ने स्वयं को जीवित साबित करने के लिए दर-दर गुहार लगाई। सुनवाई न होने पर उसने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय के आदेश पर प्रधान सहित नौ लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज हुई। क्राइम ब्रांच ने प्रधान को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया है।
आसीवन थाना क्षेत्र गांव उदसाह के मजरा पलटाखेड़ा निवासी शिवचरन ने 2024 में न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया था। उसने बताया कि गांव में करीब डेढ़ बीघा जमीन है। गांव के प्रधान रामनारायण ने सहयोगी प्रदीप कुमार सिंह के साथ मिलकर 20 दिसंबर 2023 को लेटरपैड पर उसे 30 वर्ष पूर्व ही मृत दर्शाते हुए प्रमाणपत्र बनाया और उसकी जमीन का वारिस विकास पुत्र गयादीन निवासी पलटाखेड़ा को घोषित कर दिया। फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर पांच जनवरी 2024 को क्षेत्रीय चकबंदी लेखपाल राजेश ने भूमि वारिस दर्शाए गए विकास नाम के नाम कर दी। विकास हरदोई के संडीला तहसील क्षेत्र गांव भदसेन अटवा का निवासी है।
उसी भूमि को विकास ने 23 फरवरी 2025 को गांव के ही मजरा जमालापुर निवासी अनूप के नाम बैनामा कर दिया। इसकी जानकारी होने पर वह थाना, तहसील, समाधान दिवस में स्वयं को जीवित साबित करने के लिए चक्कर लगाता रहा। सुनवाई न होने पर उसने मुख्यमंत्री के अलावा आईजी व डीआईजी को भी पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई लेकिन बात नहीं बनी। इस पर उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर आसीवन पुलिस ने छह अक्तूबर 2024 को कूटरचित दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी में शामिल रहे प्रधान रामनारायण, सहयोगी प्रदीप सिंह, चकबंदी लेखपाल राजेश व कानूनगो जगदीश सहित नौ लोगों प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। पीड़ित की मांग पर जांच क्राइम ब्रांच उन्नाव को स्थानांतरित की गई थी।
एसओ प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि विवेचक शिवप्रकाश पांडेय ने ग्राम प्रधान सहित पांच लोगों के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया था। इनमें ग्राम प्रधान को बुधवार उनके घर से गिरफ्तार किया गया है। शेष चार आरोपियों की तलाश की जा रही है।