फोटो-3- भजन गातीं कीर्तनकार क्रांतिमाला। स्रोत: आयोजक
अचलगंज। जगजीवनपुर स्थित मां कामाक्षिणी मंदिर के वार्षिकोत्सव पर रविवार की रात जवाबी कीर्तन का आयोजन किया गया। इसमें मध्यप्रदेश के छतरपुर के बाबूलाल राजपूत और कानपुर की क्रांति माला के जवाबी कीर्तन से दर्शक रोमांचित हो गए।
कार्यक्रम की शुरुआत क्रांति माला ने सरस्वती वंदना से की। गाया ‘आई शरण में तेरी उद्धार करो मां, हे हंस वाहिनी कंठ में रस धार भरो मां।’ इसके बाद बाबूलाल राजपूत ने कैकयी-सुमित्रा कथानक का वर्णन सुनाते हुए गाया, ‘चौदह बरस रावण का था जीवन, चौदह बरस ही रहे रामजी वन।’ इसके जवाब में क्रांति माला ने ‘चौदह बरस को पिया वन जो जाए, चौदह घड़ी सिया जी न पाए।’ गाकर श्रोताओं की तालियां बटोरी।
इसके अलावा श्रवण कुमार, राजा दशरथ के प्रसंग पर भी दोनों कीर्तनकारों ने भजनों के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। सोमवार सुबह तक दोनों कलाकारों के बीच मुकाबला। अंत में निर्णायकों ने दोनों कलाकारों को बराबरी का सम्मान दिया। कार्यक्रम से पूर्व मंदिर परिसर में हवन पूजन के बाद भंडारे का भी आयोजन हुआ। यहां एडवोकेट अभिजीत श्रीवास्तव व देवेश नाथ मिश्र आदि लोग रहे।