फोटो-2-कार्यशाला में फॉरेंसिक की उपयोगिता पर जानकारी देते सेवानिवृत्त अपर पुलिस महानिदेशक डॉ. ज
उन्नाव। पुलिस लाइन में ‘नए आपराधिक कानून में फॉरेंसिक की भूमिका’ विषय पर कार्यशाला हुई। सेवानिवृत्त अपर पुलिस महानिदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने अध्यक्षता की। उन्होंने पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को घटनाओं की विवेचना में फॉरेंसिक साक्ष्यों का महत्व बताया।
डॉ. गोस्वामी ने बताया कि अपराधों की जांच के लिए फॉरेंसिक साक्ष्यों का प्रयोग आवश्यक है। आधुनिक आपराधिक न्याय प्रणाली में वैज्ञानिक साक्ष्यों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया जिससे निष्पक्ष और त्वरित विवेचना संभव हो सकेगी। पुलिस कर्मियों को घटनास्थल से साक्ष्य एकत्रित करने की विधियों और चेन ऑफ कस्टडी का पालन करने की नसीहत दी। कहा कि नए कानूनों का उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना है जिसके लिए वैज्ञानिक और प्रामाणिक साक्ष्य जरूरी हैं। उन्होंने ‘लॉ विद लैब्स’ पर जोर देते हुए कहा कि कानून और विज्ञान का समन्वय ही प्रभावी आपराधिक न्याय प्रणाली का आधार बनेगा। कार्यशाला में एसपी जय प्रकाश सिंह, एएसपी दक्षिणी प्रेमचंद, सहायक पुलिस अधीक्षक संचित शर्मा, सीओ विनी सिंह के अलावा सभी थानों एसआई, आरक्षी और पुलिस लाइन में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रिक्रूट शामिल रहे।
वैज्ञानिक विवेचना से न्याय सुनिश्चित
कार्यशाला में ‘फॉरेंसिक जस्टिस = विज्ञान+कानून’ की अवधारणा स्पष्ट की गई। बताया गया कि वैज्ञानिक जांच और कानूनी प्रक्रिया मिलकर सटीक जांच सुनिश्चित करती है। इससे दोषियों की पहचान और निर्दोषों की सुरक्षा संभव हो पाती है। पुलिस कर्मियों को विवेचना में वैज्ञानिक तरीकों का अधिकतम उपयोग करने का निर्देश दिया गया।