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Unnao News: जहां दवाएं जलाई गईं, वहां का कैमरा मिला बंद

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सफीपुर। सीएचसी में दस बोरी दवाएं जलाने के मामले में मंगलवार को एडीएम के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच टीम ने पांच घंटे जांच की। इसमें सीएचसी अधीक्षक व अन्य स्टॉफ के बयान दर्ज किए गए। वहीं जांच के दौरान सीएचसी में लगे 18 कैमराें में तीन खराब पाए गए हैं।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सफीपुर में रोज सबसे अधिक खपत होनी वाली दस बोरी दवाएं, स्वास्थ्य कर्मियों ने शनिवार को जला दीं थी। इन दवाओं में लेवोसेटिरिजिन टैबलेट, लिग्नोकेन जेल, पैरासीटॉमॉल टैबलेट और मेट्रोनाइडाजोल सिरप आदि प्रमुख दवाइयां शामिल थीं। मामले में सीएमओ ने निदेशक पैरामेडिकल को पत्र भेजकर चीफ फार्मासिस्ट को निलंबित करने की सिफारिश की है। वहीं सीएचसी अधीक्षक को मुख्यालय ही अटैच रखा गया है, ताकि साक्ष्यों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न की जा सके।
मंगलवार को दोपहर 2:40 बजे एडीएम (नामिम गंगे) विधेश कुमार, एसीएमएओ डॉ. आरके गौतम और डॉ. एचएन प्रसाद सफीपुर सीएचसी पहुंचे। एडीएम सबसे पहले जलाई गईं दवा देखने पहुचें। यहां पहले से ही सभी साक्ष्य मिटाए जा चुके थे। वहीं टीम ने सीसीटीवी कैमरे की फुटेज जब देखनी की बात कही तो बाहर की ओर का कैमरा खराब होने की जानकारी मिली। इस पर टीम ने नाराजगी जाहिर की। इसके बाद एडीएम अधजली दवाएं जहां रखवाईं गई थी उस कमरे पहुंचे तो उन्हें वहां कुछ भी नहीं मिला। टीम ने डॉ.ब्रजेश सिंह, स्टॉफ नर्स गीता सहित अन्य स्टॉफ मौजूद स्टॉफ के बयान दर्ज किए। वहीं मौका देखकर कुछ स्टॉफ सीएचसी से निकल भी गए।
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मिटाए गए साक्ष्य
अधजली दवाएं जहां रखवाई थी, वहां सफाई कराई गई। इसके अलावा जिस स्थान पर दवाएं जलाई गई वहां से भी साक्ष्य मिटाए गए हैं। वहीं सूत्रों के अनुसार जांच के पहले ही जानकारी मिल जाती है और साक्ष्य मिटा दिए जाते हैं।
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