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Unnao News: कच्ची दीवार गिरने से बाबा और पौत्र की मौत

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फोटो-6- हंसराम (फाइल फोटो)
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उन्नाव। मसवासी गांव में बुधवार सुबह कच्ची दीवार ढह गई। पास खड़े मंजन कर रहे बाबा और पौत्र की मलबे में दबने से मौत हो गई। सूचना पर विधायक और डीएम ने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर मृतक के बेटे को चार-चार लाख के दो चेक दिए। इसके अलावा अन्य लाभ दिलाने का आश्वासन दिया।
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सदर कोतवाली के मसवासी निवासी हंसराम पासवान (60) आठ साल के पौत्र आयु पुत्र भीम के साथ बुधवार की सुबह 10:15 बजे घर की दीवार के पास बैठकर मंजन कर रहे थे। बारिश के चलते दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। इससे बाबा और पौत्र मलबे में दब गए। दीवार गिरने की आवाज सुनकर दूसरे कमरे से हंसराम का बेटा विकास और अन्य परिजन पहुंचे। मलबे से दोनों को निकालकर जिला अस्पताल लाए। डॉक्टर ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने हंसराम और आयु का पोस्टमार्टम कराया। इसमें पता चला कि आयु की मौत लीवर फटने से हुई है। उसका बायां पैर टूटा था। पेट में भी गंभीर चोट मिली है। हंसराम की मौत सिर में गंभीर चोट लगने से हुई है।
घटना की सूचना पर एडीएम सुशील कुमार गोंड, सदर एसडीएम राजेश कुमार विश्वकर्मा, सिटी मजिस्ट्रेट मनोज कुमार सिंह, कोतवाल और चौकी इंचार्ज रविशंकर पांडेय ने मौके पर पहुंच जांच की। हंसराम की मौत से पत्नी माया, बच्चों विकास, भीम और संजीव बेहाल हैं। सदर विधायक पंकज गुप्ता, डीएम घनश्याम मीना पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। हंसराम के बेटे विकास को आपदा राहत कोष से चार-चार लाख के दो चेक दिए। किसान दुर्घटना बीमा योजना, आवास, पारिवारिक लाभ, विधवा पेंशन दिलाने का आश्वासन दिया।
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दो बेटे दिव्यांग, हंसराम पर ही थी परिवार की जिम्मेदारी
स्कूल खुला होता तो बच जाती आयु की जान
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। कच्ची दीवार ढहने से मृत वृद्ध किसान के दो बेटे दिव्यांग हैं। वृद्ध पर ही परिवार की जिम्मेदारी थी। बेटे आयु का शव लेकर बिलख रही मां बार-बार यही कह रही थी कि अगर स्कूल में छुट्टी न होती तो बेटा घर में नहीं होता और उसकी जान बच जाती।
बेटे विकास ने बताया कि भाई भीम के पैर की हड्डी टूटी है। वह बचपन से ही दिव्यांग हैं। दूसरे भाई संजीव के कमर में चोट होने के साथ पैर की हड्डी टूटी है। बताया कि संजीव टाइल्स कारीगर हैं। करीब डेढ़ साल पहले शुक्लागंज के आजाद नगर में चार मंजिला इमारत में टाइल्स लगाने के दौरान नीचे गिर गए थे। तब से घर पर ही लेटे रहते हैं। पिता ही खेती कर परिवार पालते थे। मलबे में दबकर जान गंवाने वाला आयु कक्षा दो का छात्र था। मां माया और पिता भीम का इकलौता बेटा था। मां का कहना था कि बुधवार को बारावफात की छुट्टी थी। इस कारण बेटा घर पर था। अगर स्कूल खुला होता तो वह आठ बजे स्कूल चला जाता और उसकी जान बच जाती। इकलौते बेटे की मौत से पति-पत्नी बेहाल हैं। रिश्तेदार दोनों को संभाल रहे थे।

दो कमरे हैं पक्के, शेष कोठरियां कच्ची
बेटे विकास ने बताया कि घर में सिर्फ दो कमरे ही पक्के हैं शेष कोठरियां कच्ची हैं। बताया कि 15 साल पहले कॉलोनी आई थी लेकिन उस समय प्रधान ने वह कॉलोनी किसी दूसरे को दे दी थी। तब से कॉलोनी नहीं मिली। बताया कि वर्तमान प्रधान उमेश राव से भी गुजारिश की थी लेकिन ध्यान नहीं दिया।

फोटो-6- हंसराम (फाइल फोटो)

फोटो-6- हंसराम (फाइल फोटो)

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