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Unnao News: सर्वर न आने से ठप रहा खाद वितरण

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हसनगंज के धौरा सोसायटी केंद्र पर सर्वर न आने से डीएपी के इंतजार में बैठे किसान। संवाद - फोटो : ArchivE
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उन्नाव। ई-पॉस मशीन में सर्वर न आने से पूरे दिन खाद का वितरण नहीं हो सका। सुबह खाद की उम्मीद में पहुंचे किसान घंटों इंतजार के बाद मायूस होकर लौटने को मजबूर हुए।
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रबी सीजन में आलू और सरसों की बोआई का कार्य शुरू करने के लिए किसानों को इस समय डीएपी खाद की जरूरत है। बुधवार को डीएपी की उम्मीद में किसान सुबह ही जिले में संचालित करीब 167 साधन सहकारी समितियों में पहुंचकर लाइनों में लग गए। निर्धारित समय पर जब केंद्र खुले और वितरण की तैयारी शुरू हुई तो ई-पॉस मशीन का सर्वर चला गया। इससे वितरण शुरू होने से पहले ही ठप हो गया। किसान सर्वर आने की उम्मीद में पूरे दिन केंद्र पर ही मौजूद रहकर इंतजार करते रहे। शाम तक सर्वर नहीं आया, जिससे किसानों को मायूसी हाथ लगी।
सहायक निबंधक सहकारिता रवींद्र कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यालय से ही सर्वर की समस्या रही। इस कारण वितरण का कार्य नहीं हो सका। उच्चाधिकारियों से जल्द सुधार कराने की बात कही है। बताया कि जिले में खाद का पर्याप्त स्टॉक है। बताया कि यूरिया 8562 व डीएपी 2100 मीट्रिक टन गोदाम में है। पांच हजार एमटी डीएपी का अतिरिक्त मांग पत्र उच्चाधिकारियों को भेजा जा चुका है। अगले सप्ताह 26 सौ एमटी की एक और रैक आने की उम्मीद है। बताया कि किसान फार्मर आईडी एवं आधारकार्ड के साथ सहकारी उर्वरक ब्रिकी केंद्रों से निर्धारित दर एवं फसलवार संस्तुत मात्रा के अनुसार खाद प्राप्त कर सकते हैं।
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अक्तूबर का दूसरा पखवाड़ा खेती किसानी के लिए महत्वपूर्ण
उन्नाव। चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय कानपुर के मौसम विशेषज्ञ डॉ. सुनील पांडेय ने बताया अक्तूबर का दूसरा पखवाड़ा (16 से 31 अक्तूबर) खेती किसानी के लिए महत्वपूर्ण है। खरीफ फसलों की कटाई-मड़ाई को अंतिम रूप देने और रबी फसलों की बोआई की शुरुआत करने का यह संधिकाल (बदलाव का समय) है। बताया कि धान की अगेती (जल्दी पकने वाली) किस्मों की कटाई समय पर पूरी करें।
बासमती या देर से पकने वाली धान की फसलों में इस समय फूल आने या दाने भरने की अवस्था होती है। खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई करें। कीटों और रोगों (जैसे ब्लास्ट या धब्बा रोग) की लगातार निगरानी करें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की सलाह से फंगीसाइड का छिड़काव करें। फसलों की कटाई के तुरंत बाद खेतों की जुताई करें। मिट्टी की बची नमी को बचाने के लिए कल्टीवेटर या रोटावेटर चलाकर पाटा लगाएं, जिससे मिट्टी भुरभुरी और बोआई के लिए तैयार हो जाए। अक्तूबर का दूसरा पखवाड़ा सरसों की बोआई के लिए सबसे बेहतरीन समय है। बोआई से पहले बीजों को उपचारित जरूर करें। चना और मसूर की बोआई इस पखवाड़े में शुरू कर देनी चाहिए। आलू की बोआई के लिए खेतों को अंतिम रूप देकर शुरुआत करें। गोभी, गाजर, मूली, मटर और पालक जैसी रबी की सब्जियों की बोआई का कार्य भी इसी समय करें।
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