फोटो-23-नाबार्ड के कार्यक्रम में अधिकारियों के साथ मंच पर मौजूद सरोजनी व ललिता। स्रोत: परिजन
उन्नाव। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के 45 साल पूरे होने पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में जिले की सुमेरपुर की ड्रोन दीदी और समूह संचालिका को आमंत्रित किया गया। दोनों ने महिलाओं को संघर्ष से सफलता की कहानी बताई। साथ ही ड्रोन व जरदोजी के जरिए आत्मनिर्भर बनने की जानकारी भी दी।
नाबार्ड की ओर से लखनऊ में 13 जुलाई को आयोजित कार्यक्रम में बीघापुर के सथनीबालाखेड़ा की ड्रोन दीदी के नाम से चर्चित ललिता व मियागंज की समूह संचालिका सरोजनी देवी को आमंत्रित किया गया। इसमें जनपद की 20 और पूरे प्रदेश से करीब 500 महिलाएं भी पहुंचीं। ललिता व सरोजनी को मंच पर जगह दी गई। ललिता ने ड्रोन संचालन की जानकारी दी। बताया कि पहले ड्रोन संचालन में बहुत दिक्कतें आईं। महिला होने के कारण किसान उनसे ड्रोन के जरिए कीटनाशक व खाद का छिड़काव कराने से हिचकते थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपना काम करती रहीं। कुछ दिन बाद जब किसान जागरूक हुए तो काम मिलना शुरू हो गया। अब तक करीब एक हजार एकड़ में छिड़काव कर चुकी हैं। इसके एवज में 300रुपये प्रति एकड़ का मेहनताना मिलता है। इसी प्रकार सरोजनी ने बताया कि उन्होंने समूह से तीन हजार रुपये का ऋण लेकर जरदोजी का काम शुरू किया था। बताया कि कोई भी काम छोटा नहीं है। बस लगन से लगना पड़ता है।