उन्नाव। पुष्पक एक्सप्रेस ट्रेन में यात्रियों से अभद्रता करने पर हिरासत में लिए नेपाली युवक की आरपीएफ की कस्टडी में हुई मौत की घटना में निलंबित पोस्ट प्रभारी के स्थान पर कमांडेंट ने लखनऊ में तैनात रहे भूपेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी है। उधर, कानपुर में हुए पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में गले में सांस नली तक गहरा और आठ सेंटीमीटर लंबा जख्म होने व अत्यधिक रक्तस्राव से मौत की बात सामने आई है। कमांडेंट ने कहा कि घटना गंभीर है। विस्तृत जांच कराई जा रही है।
मालूम हो कि मंगलवार की रात लखनऊ से मुंबई जा रही पुष्पक एक्सप्रेस ट्रेन में लखनऊ और उन्नाव के बीच नेपाल के डॉग जिले के थाना बिजोली टिकरी निवासी अनिल (25) पुत्र कउदे का कुछ यात्रियों से विवाद हो गया था। गाली-गलौज का विरोध करने पर उसने ब्लेड जैसे धारदार हथियार से हमला कर एक महिला और तीन पुरुष यात्रियों को चोट पहुंचाई थी। यात्रियों ने हेल्पलाइन नंबर 139 पर सूचना दी थी। रात 10:20 बजे ट्रेन उन्नाव स्टेशन पर पहुंची तो आरपीएफ ने उसे हिरासत में लेकर आरपीएफ पोस्ट की हवालात में डाल दिया।
कुछ देर बाद उसने धारदार हथियार से गले और अन्य हिस्सों में कई वार कर खुद को घायल कर लिया। आरपीएफ कर्मियों ने उसे खून से लथपथ देखा तो एसआई सुरजीत सिंह ने सिपाहियों की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया था। हालत गंभीर होने से हैलट कानपुर रेफर कर दिया गया। वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
बुधवार को कानपुर में ही शव का पोस्टमार्टम हुआ। आरपीएफ के कमांडेंट देवांश शुक्ला ने बताया कि भूपेंद्र सिंह को उन्नाव पोस्ट प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बताया कि घटना गंभीर है, इसकी विस्तृत जांच कराई जा रही है।
बंदी के घायल होने की सूचना पर कोतवाली पुलिस भी गई थी
कोतवाल चंद्रकांत मिश्र ने बताया कि ट्रेन में नशे में मारपीट की सूचना पर युवक को आरपीएफ ने पकड़ा था। बाद में पता चला कि उसने खिड़की का कांच तोड़कर खुद ही अपनी गर्दन पर हमला कर लिया। सदर चौकी पुलिस मौके पर गई थी लेकिन आरपीएफ पोस्ट का मामला होने से लौट आई थी।
रक्तस्राव और स्वांस नली कटने से हुई थी मौत
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नेपाल निवासी अनिल की मौत अत्यधिक खून बहने ( रक्तस्त्राव) के कारण शॉक (सदमे) में जाना बताया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ठुड्डी (चिन) से लगभग तीन सेंटीमीटर नीचे, गर्दन के अगले हिस्से पर आठ सेमी लंबा सिला हुआ घाव पाया गया, जिसमें 11 टांके लगे पाए गए थे। इसके नीचे त्वचा, मांसपेशियों और हॉरिजॉन्टली (क्षैतिज रूप से) श्वासनली (ट्रकिआ) के कटने के निशान और हीमैटोमा (खून का थक्का जमना) मिला। गले में पहली चोट से लगभग एक सेंटीमीटर नीचे बाएं तरफ गर्दन के सामने वाले हिस्से में दो सेमी लंबा एक अन्य सिला हुआ घाव मिला है जिसमें दो टांके लगे पाए गए थे।