उन्नाव। जब किसानों को गेहूं की फसल की सिंचाई के लिए पानी चाहिए तब नहर विभाग रजबहों और माइनरों की सफाई करा रहा है। नहर विभाग के अधिकारी 20 दिसंबर के आसपास रजबहों और माइनरों में पानी आने की बात कह रहे हैं। इससे गेहूं की अगैती फसल बोने वाले करीब एक लाख किसानों के सामने सिंचाई का संकट आ गया है। इन किसानों को हर हाल में पांच से 10 दिसंबर तक पहली सिंचाई की जरूरत होगी। रजबहों-माइनरों में पानी न होने से किसानों को पैसा खर्च कर सिंचाई करानी पड़ेगी।
जिले में किसानों की संख्या करीब 5.50 लाख है। इनमें से करीब चार लाख किसान गेहूं की फसल बोते हैं। इस बार गेहूं बोआई का रकबा 2.24 लाख हेक्टेयर है। कृषि विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक अक्तूबर में हुई बारिश के बाद खेत में नमी होने से इस बार 10 नवंबर तक 25 फीसदी यानी करीब एक लाख किसानों ने गेहूं की बोआई कर दी थी। अब इनकी फसल करीब 25 दिन की हो रही है। ऐसे में पहली सिंचाई का समय आ गया है। पांच दिसंबर तक फसल की पहली सिंचाई करनी होगी पर रजबहों और माइनरों में पानी न होने से किसानों के सामने संकट रहेगा। हालांकि विभाग अपने रटे-रटाए रोस्टर के फार्मूले के हिसाब से चल रहा है। विभागीय अधिकारी मौसम के बदलाव के लिहाज से सफाई शुरू कराने के बजाय पुराने ढर्रे पर ही कायम रहे। इस कारण अगैती की फसल तैयार हो गई और अभी नहरों की सफाई ही चल रही है।
वर्जन...
इस बार अक्तूबर में अच्छी बारिश हुई थी। इस कारण करीब 25 फीसदी किसानों ने अगैती गेहूं बो दिया है। इनकी फसल 20 से 25 दिन की होने वाली है। नियमानुसार पहली सिंचाई 21 से 25 दिन के बीच में हो जानी चाहिए। -शशांक कुमार, जिला कृषि अधिकारी।
रजबहों-माइनरों में सिल्ट सफाई का काम तेजी से कराया जा रहा है। अब तक 41 फीसदी काम पूरा कर लिया गया है। 15 दिसंबर तक काम पूरा कर लिया जाएगा। 20 दिसंबर के आसपास नहरों में पानी आएगा। यह विभागीय रोस्टर है जो पूर्व से चला आ रहा है। वहीं सफाई के कार्य की ड्रोन से निगरानी की जा रही है। विभागीय अभियंता भी निगरानी कर रहे हैं। यदि कहीं से सफाई में खानापूर्ति की शिकायत मिलेगी तो जांच कराएंगे।
- गगन शुक्ला, एक्सईएन, शारदा नहर उन्नाव खंड।
किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने का दावा
नहर विभाग तेजी से रजबहे, माइनरों की सफाई कराने का दावा कर रहा है। अधिकारियों ने आठ दिन में ही 622 किलोमीटर लंबाई में रजबहों और माइनरों की सफाई कराने का दावा किया है। हालांकि सफाई पर सवाल भी उठ रहे हैं। किसानों का कहना है कि मुख्य मार्गों से होकर निकले रजबहों, माइनरों में तो ठीक काम किया गया अन्य हिस्सों में केवल खानापूर्ति हो रही है। कहीं पर केवल ऊपरी घास छीलकर कोरम पूरा किया जा रहा है तो कुछ जगहों पर जेसीबी से मात्र आधा से एक मीटर गहराई से सिल्ट सफाई करके छोड़ दिया गया है। अगले 12 दिन में यानी 15 दिसंबर तक 894 किलोमीटर लंबाई में सफाई होनी है।
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केस-1
न्योतनी रजबहा में सिर्फ घास छीली
हसनगंज। आसीवन ब्रांच से निकले न्योतनी रजबहा की लंबाई करीब 19 किलोमीटर है। इसकी सफाई में ठेकेदार ने जेसीबी व पोकलैंड लगाकर रजबहे के दोनों तरफ घास छीलकर बीच में छोड़ दिया। गांव लखौरा, आदमपुर बरेठी, न्योतनी, चंदौली बुजुर्ग, दयालपुर, धोपा, उधवाखेड़ा, गरवरखेड़ा, फिरोजपुर, असुरनखेड़ा, रामपुर अखौली, रायखेड़ा, धीरखेड़ा, कुरौली के किसान चंद्रशेखर द्विवेदी, संजीवन, रामजीवन, अर्जुन, संदीप, ओमप्रकाश, शिव नारायण द्विवेदी, सोनू, सतीश आदि ने आरोप लगाया कि ठेकेदार ने सिल्ट सफाई में मानक को ताक पर रखकर काम किया। केवल ऊपरी घास छील दी जबकि आठ इंच गहरी खोदाई का टेंडर हुआ है। (संवाद)
केस-2
सफाई में नहीं निकाली जा रही सिल्ट
मौरावां। ब्लॉक हिलौली से निकले मौरावां रजबहा की सफाई में केवल खरपतवार साफ किया जा रहा है। यहां सिल्ट सफाई का काम नहीं हुआ है। हिलौली माइनर की अभी सफाई बाकी है। शारदा नहर से निकला औरास रजबहा गेरूआ, नंदौली, हाजीपुर गोसा होते हुए रायपुर राई गांव के आगे तक जाता है। इस रजबहा से कई गांवों की हजारों बीघे से ज्यादा जमीन सिंचित होती है। किसान सुरेंद्र सिंह, केशव, रामचंद्र, राजकिशोर व राजेंद्र का कहना है कि रजबहा की पूरी सिल्ट नहीं निकाली जा रही है। ऐसे में पानी ओवरफ्लो होकर खेतों में भर जाएगा। इससे फसल बर्बाद हो सकती है। (संवाद)
बॉक्स
- शारदा खंड में 14 रजबहे व 111 माइनर
- सिंचाई खंड में 18 रजबहे व 99 माइनर
- सिल्ट सफाई को भेजा प्रस्ताव-3.60 करोड़
- अब तक मिले 1.50 करोड़