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Unnao News: दिवंगत भाई को न्याय के लिए अमृतलाल ने 40 साल लड़ी कानूनी लड़ाई

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चकलवंशी (उन्नाव)। दिवंगत भाई को न्याय दिलाने के लिए छोटे भाई ने करीब 40 साल कानूनी लड़ाई लड़ी। ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में मजबूती से पक्ष रखा। हाईकोर्ट ने भाई के हत्यारों को दोषी माना तो उसने फैसले पर संतुष्टि जताई। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने दो को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जबकि दो की माैत हो चुकी है।
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17 जून 1984 को जमुना प्रसाद और पड़ोसी हरनाम के बीच छत से बारिश का पानी निकालने के लिए पनारा लगाने के विवाद में मारपीट हुई थी। इलाज के दौरान जमुना प्रसाद की मौत हो गई थी। छोटे भाई अमृतलाल ने गांव के ही जगतपाल, हरनाम, तुलसीराम, लक्ष्मीनारायण के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। चारों को जेल भेजने के 10 महीने बाद जमानत मिल गई। वर्ष 1986 में ट्रायल कोर्ट ने चारों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। अमृतलाल ने आदेश के 15 दिन बाद ही हाईकोर्ट में अपील की थी। मुकदमा 40 साल तक विचाराधीन रहा। इस दौरान नामजद आरोपियों में तुलसीराम, लक्ष्मी नारायण की मौत हो गई। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को उपयुक्त नहीं पाया और आरोपियों को दोषी पाते हुए न्यायिक हिरासत में लेने के आदेश दिए। आदेश का पालन करते हुए माखी थाना पुलिस ने हरनाम और जगतपाल को जेल भेज दिया। हाईकोर्ट से न्याय पर अमृतलाल और परिवार संतुष्ट है।
अमृतलाल ने बताया कि ट्रायल कोर्ट का फैसला आने पर मायूसी हुई थी लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। बताया कि जब हत्या हुई थी तब भतीजा कृपाशंकर सिर्फ आठ महीने का था। भाभी जगदेई का का भी सराहा छिन गया। मुकदमा लड़ने के साथ ही बड़े भाई के परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी उसी पर आ गई थी। इस पर उसने शादी न करने का फैसला लिया और भाभी जगदेई से विवाह कर लिया। भतीजे का बेटे की तरह पालन पोषण किया।
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