ग्राम पंचायत सकरौली में छह लोगों को घायल करने वाले तेंदुए की तलाश में वन विभाग की पांच टीमों ने 15 गांवों में कांबिंग की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। बुधवार को मजरा बंगला के जंगल में पंजे के निशान दिखे हैं। निशान कटरी से बंगला गांव की तरफ आने के हैं। ग्रामीणों को रात के समय खेतों की तरफ न जाने और घर में ही रहने को कहा गया है।
मंगलवार को सकरौली ग्राम पंचायत के मजरा बंगला के पास दोपहर में करन सिंह के पिपरमिंट के खेत पास तेंदुए ने 10 साल के बच्चे ब्रजेश, अनिल कुमार, कमलू, मेहताब, मुकेश और रैना पर हमला कर घायल कर दिया था। इससे धन्नाखेड़ा, हुलासी खेड़ा, गड़रियन खेड़ा, मल्हापुर गांव के लोग भी सहमे हैं। वन विभाग की टीम ने बुधवार सुबह चार बजे तेंदुए की तलाश शुरू कर दी।
क्षेत्रीय वन अधिकारी सुरेश कुमार सिंह, वन दरोगा एके अवस्थी, पप्पू यादव, राजीव कुमार, टीम के साथ जंगल, झाड़ियों व खेतों में तेंदुए को खोजते रहे। तेंदुआ कहीं नहीं दिखा। डीएफओ ईशा तिवारी के निर्देशन में वन विभाग की पांच टीमों ने जामड़, माढ़ापुर, मल्हापुर, हरदासपुर मल्लाहनपुरवा सहित 15 गांवों में तेंदुए की तलाश की। वन विभाग को आशंका है कि तेंदुआ रात के अंधेरे में कहीं दूर निकल गया है।
मल्हापुर से बंगला गांव पहुंचने का अनुमान
डीएफओ ईशा तिवारी ने बताया कि मल्हापुर गांव के पास एक खेत में तेंदुए के पैर के निशान दिखे हैं। अनुमान है कि यह निशान मंगलवार के हैं। लग रहा है कि तेंदुआ मल्हापुर से होते हुए ही बंगला गांव तक गया है। पानी व शिकार की उपलब्धता होने से तेंदुए अक्सर नदी के आसपास जंगल में रहते हैं।
उन्होंने बताया कि तेंदुआ (लेपर्ड) एक दिन में करीब 40 से 50 किमी दूरी तय कर लेता है। वह 80 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है। संभावना है कि तेंदुआ इस क्षेत्र से दूर चला गया हो। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं है। इसलिए टीमें तैनात कर दी गईं हैं।