उन्नाव। पंचायतीराज विभाग और उन्नाव खंड शारदा नहर कार्यालय में करोड़ों की गड़बड़ी के मामले में लंबित दो जांचों की रिपोर्ट तय समय में नहीं मिलीं। इसे सीडीओ ने गंभीरता से लेते हुए जांच टीम को रिमाइंडर जारी करते हुए सात दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। अल्टीमेटम दिया है कि यदि निर्धारित अवधि में रिपोर्ट नहीं मिली तो कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासक अवधि में सहायक विकास अधिकारियों (एडीओ) पंचायत द्वारा निकाले गए 7.54 करोड़ की जांच के लिए गठित सात टीमें तीन माह बाद भी रिपोर्ट नहीं दे सकी हैं। पिछले कार्यकाल के प्रधानों का चार्ज 25 दिसंबर 2020 की रात 12 बजे वापस ले लिया गया था। कार्यकाल खत्म होने के बाद रात 12 बजे प्रधानों को विभागीय साइट से अनरजिस्टर्ड कर दिया गया था। इसके बाद पंचायतों में सहायक विकास अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त किया गया था। फिर त्रिस्तरीय चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई थी। चुनाव परिणाम जारी होने और नवनिर्वाचित प्रधानों के शपथ ग्रहण (पांच मई से 25 मई 2021) के मध्य प्रशासक के पद पर तैनात रहे एडीओ पंचायत ने नियम विरुद्ध तरीके से 7.54 करोड़ रुपये ग्राम निधि खाते से निकाल लिए थे। प्रशासन ने अगस्त में मामले की जांच के लिए सात टीमें गठित की थीं। टीमों को निर्देश दिए थे कि एक माह में जांच पूरी करके रिपोर्ट दें। हालांकि तीन माह बीत गए लेकिन न तो जांच पूरी हो सकी और न ही रिपोर्ट उच्चाधिकारियों तक पहुंची।
10 दिन में देनी थी उन्नाव खंड शारदा नहर कार्यालय में घोटाले की जांच रिपोर्ट
उन्नाव। भगवंतनगर विधायक आशुतोष शुक्ला ने प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन को भेजे गए पत्र में उन्नाव खंड शारदा नहर के अधिशाषी अभियंता पर गंभीर आरोप लगाए थे। इसमें बताया था कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में निरीक्षण भवन के लिए एक्सईएन ने 29.91 लाख रुपये से गद्दे, एसी, गीजर आदि सामान खरीदा था लेकिन यह सामान निजी प्रयोग के लिए घर लेकर चले गए। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2023-24 में लोनी ड्रेन की सफाई के लिए आवंटित राजकीय धन का बिना कार्य कराए ही मार्च माह में फर्जी टेंडर प्रक्रिया दिखा एक करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया। चार बिंदुओं के शिकायती पत्र में सिल्ट सफाई के नाम पर 2.45 करोड़ और वित्तीय वर्ष 2023-24 में केवल डीजल खर्च व गाड़ियों की मरम्मत में 50 लाख से अधिक का भुगतान कराने का भी आरोप लगाया था। सीडीओ प्रेम प्रकाश मीणा ने आठ नवंबर को प्रकरण की जांच के लिए पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड हरदयाल अहिरवार की अध्यक्षता में समिति गठित कर दी। टीम में उपायुक्त मनरेगा मुनेश चंद्र और लघु सिंचाई के सहायक अभियंता जितेंद्र बहादुर सिंह को भी शामिल किया था। अफसरों को 10 दिन में रिपोर्ट देने के आदेश थे लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है। (संवाद)
वित्तीय अनियमितता के दोनों मामले गंभीर हैं। जांच टीम को समय पर रिपोर्ट देनी चाहिए थी लेकिन अब तक दोनों मामले ठंडे बस्ते में पड़े हैं। इसलिए प्रकरणों में रिमाइंडर जारी किए गए हैं। जांच टीम को चेतावनी के साथ रिपोर्ट देने के लिए सात दिन का समय दिया गया है।
- प्रेम प्रकाश मीणा, सीडीओ
अल्हागंज क्षेत्र की रतनापुर बेला सहकारी समिति में खाद नहीं होने से पड़े ताले। संवाद
अल्हागंज क्षेत्र की रतनापुर बेला सहकारी समिति में खाद नहीं होने से पड़े ताले। संवाद