उन्नाव। शहर में भारी वाहनों का आवागमन रोकने के लिए दोस्तीनगर से दही चौकी बाईपास बनाने का काम अंतिम चरण में है। 34 करोड़ के इस बाईपास पर 15 अगस्त तक यातायात शुरू करने की तैयारी है। इस बाईपास पर यातायात शुरू होने से हरदोई, कन्नौज की ओर से आने वाले भारी वाहन शहर में न प्रवेश करके बाहर से ही लखनऊ-कानपुर हाईवे जा सकेंगे और लोगों को जाम से निजात मिलेगी।
हरदोई मार्ग स्थित अग्निशमन प्रशिक्षण केंद्र से लखनऊ-कानपुर हाईवे स्थित दही चौकी तिराहा तक 9.5 किमी लंबा और सात मीटर चौड़ा बाईपास बनाने की घोषणा वर्ष 2016 में उन्नाव-शुक्लागंज फोरलेन मार्ग के लोकार्पण में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने की थी। पहले नए प्रस्तावित बाईपास के क्षेत्र में वन विभाग की 7.5 हेक्टेयर जमीन का पेच फंसने से लंबे समय तक मामला फाइलों में उलझा रहा था। जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद पीडब्ल्यूडी द्वारा बीघापुर में उपलब्ध कराई गई जमीन पर वन विभाग के सहमति जताने के बाद जुलाई 2024 में बाईपास निर्माण शुरू हुआ था। शासन द्वारा स्वीकृत 34 करोड़ के बजट से निर्माण तेजी से शुरू कराया गया था। 31 मार्च 2025 तक बाईपास शुरू करने की समय सीमा रखी गई थी। इसी बीच सिंघूपुर के पास रेलवे क्रासिंग से आगे दो बीघे जमीन के कास्तकार दो किसानों ने कम मुआवजे को लेकर हाईकोर्ट में वाद दायर कर दिया था। पीडब्ल्यूडी ने किसानों से वार्ता करके आपसी सहमति बना ली थी। इसके बाद फिर से कार्य ने तेजी पकड़ी। अब निर्माण कार्य लगभग पूरा हो गया है।
-
रोजाना औसतन पांच हजार भारी वाहन निकलते हैं शहर
वर्तमान समय में प्रतिदिन करीब पांच हजार वाहन अग्निशमन प्रशिक्षण महाविद्यालय दोस्तीनगर के सामने से मोहल्ला दरोगाबाग, बाबूगंज पुल, मोतीनगर और आवास विकास कालोनी होते हुए लखनऊ कानपुर हाईवे आते-जाते हैं। शहर के अंदर से आवागमन होने के कारण अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। कई लोग दुर्घटनाओं में जान भी गवां चुके हैं। वहीं जाम भी लगता है। इसी समस्या को खत्म करने के लिए बाईपास निर्माण कराया गया है। अब शहरवासियों को 15 अगस्त से बाईपास के शुरू होने से जाम से निजात मिलने की उम्मीद है।
-
निर्माण कार्य 95 फीसद पूरे हो गए हैं। केवल सुरक्षात्मक कार्य के तहत रेडियम पट्टी, पुलियों का रंगरोगन आदि होना है। दो दिन में यह कार्य भी शुरू होने जा रहे हैं। प्रयास किया जा रहा है कि 15 अगस्त तक बाईपास को वाहनों के लिए खोल दिया जाए।
हरदयाल अहिरवार, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड।