उन्नाव। न्यायालय ने महिला के दो हत्यारोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
गंगाघाट कोतवाली के आजाद नगर निवासी सुशील ने पांच जुलाई 2021 को पुलिस को तहरीर दी थी। बताया था कि उसकी शादी 27 साल पहले सोहरामऊ के हिम्मतगढ़ गांव की रहने वाली रामलली से हुई थी। उसके तीन बच्चे ज्योती, काजल व कृष्णा हैं। शादी के कुछ साल बाद आपसी मनमुटाव के चलते पत्नी रामलली मायके में रहने लगी थी। तीन जुलाई 2021 की रात करीब 10 बजे उसके फोन पर साले अजय ने फोन किया और रामलली की मौत की जानकारी दी। अजय ने घटना की जानकारी पूजा नाम की महिला के जरिए मिलने की बात कही थी। चार जुलाई 2021 को वह जिला अस्पताल पहुंचा, जहां भर्ती पूजा ने बताया कि वह कानपुर के नौबस्ता की रहने वाली है। रामलली से मिलने उसके कमरे पर आती रहती थी। तीन जुलाई की सुबह वह भी रामलली के कमरे में सो रही थी। इस दौरान लोकनगर निवासी श्यामू पासवान व जुराखनखेड़ा निवासी लाला उर्फ राजेश धोबी आए और बेड पर लेट गए थे। इससे क्षुब्ध होकर रामलली ने दोनों को मारपीट कर भगा दिया था। शाम करीब पांच बजे दोनों वापस आए और वहां मौजूद कुशपाल सिंह व उसे समोसा लेने भेज दिया। इस दौरान कमरे में रामलली, श्यामू व राजेश ही मौजूद थे। जब वह दोनों समोसा लेकर लौटे तो रामलली कमरे में बेसुध पड़ी थी। एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया। जहां मृत घोषित कर दिया।
सुशील की तहरीर पर पुलिस ने श्यामू और लाला उर्फ राजेश के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी। छह जुलाई 2021 को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। मुकदमा अपर सत्र न्यायालय सप्तम में विचाराधीन था। सोमवार को मुकदमे की सुनवाई पूरी हुई। साक्ष्यों और गवाहों को आधार पर दोषी साबित होने पर न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
किशोरी को ले जाने में दो लोगों को तीन साल की जेल
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। अपर सत्र न्यायालय 13 पॉक्सो न्यायालय ने किशोरी को बहला फुसलाकर ले जाने के दो दोषियों को तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों पर 10-10 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
हसनगंज कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी पिता ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि 27 नवंबर 2018 की शाम करीब चार बजे उसकी 16 वर्षीय बेटी नन्हक्के की पत्नी सरला व उसके बेटे फुलवा के साथ मोटरसाइिकल से बाजार गई थी। शाम को फुलवा व सरला घर वापस आ गए, लेकिन उसकी बेटी वापस नहीं लौटी। उसने सरला व फुलवा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कुछ दिन बाद पुलिस ने किशोरी को खोजा और 164 के बयान कराए। जिसमें बाराबंकी जनपद के रामनगर थाना क्षेत्र के लालपुर निवासी शोएब अहमद व हसनगंज के मदारपुर गांव की सरला रावत ने उसे बहला फुसलाकर ले जाने की बात सामने आई। विवेचक तत्कालीन उपनिरीक्षक इंद्रपाल सिंह ने फुलवा का नाम हटाते हुए शोएब का नाम शामिल किया और 2017 को शोएब व सरिता को जेल भेज दिया। मुकदमा लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन था। सोमवार को मुकदमे की अंतिम सुनवाई में न्यायाधीश रवी प्रकाश साहू ने दोनों दोषियों को तीन-तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।