पाटन। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मनबोधन बाजपेयी ने शिक्षा, समाजसेवा व जनकल्याण के कई कार्य किए। जिस कारण उनका नाम इतिहास के पन्नों में आज भी अमर हैं। सोमवार को उनकी 114वीं जयंती निराला विद्यालय पतारी में मनाई जाएगी। उनकी जयंती पर कई शिक्षाविद् व साहित्यकार शामिल होने आएंगे।
22 फरवरी 1907 में पतारी गांव में जन्मे पंडित मनबोधनलाल बाजपेयी का चरित्र व योगदान प्रेरणास्पद बना हुआ है। स्वतंत्रता संग्राम में कूदने पर उन्हें देश के शीर्षस्थ नेताओं के संपर्क में आने का अवसर मिला। इनमें पंडित जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, चंद्रभान गुप्त, बनारसीदास, उमाशंकर दीक्षित, विशंभर दयालु त्रिपाठी, अलगू राय शास्त्री, शांति प्रपन्न, भूपेंद्रनाथ शुक्ला, राम नारायण पांडे प्रभूति आदि प्रमुख हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी उनके व्यक्तित्व से प्रभावित थीं। स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय सहभागिता होने के चलते 1942 में रेल पटरी उखाड़ने के अभियोग में जेल भी गए। माफी न मांगने पर उन्हें 6 साल की सजा तथा यातनाएं और प्रताड़ना झेलनी पड़ीं। स्वतंत्रता के बाद समाजसेवा का व्रत लेकर वह राजनीतिक मंच पर सदैव गतिशील रहे। उन्होंने जिला कांग्रेस कमेटी से लेकर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के विभिन्न पदों का दायित्व वहन किया। वर्ष 1963 से 1970 तक वह जिला परिषद उन्नाव के अध्यक्ष रहे। अनेक साहित्यिक सांस्कृतिक एवं शैक्षिक संस्थाओं की स्थापना की।
वर्ष 1948 में जिला बोर्ड उन्नाव की सदस्यता, वर्ष 1952 में किसान आंदोलन में सक्रिय भागीदारी तथा वर्ष 1962 में क्षेत्र समिति सुमेरपुर के प्रमुख निर्वाचित हुए। वर्ष 1963 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य, 1963 में जिला परिषद उन्नाव के अध्यक्ष तथा 1963 में पतारी में निराला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की स्थापना की और 1986 में विवेकानंद संस्कृत पाठशाला का शुभारंभ किया। 20 अगस्त 1991 को उनका निधन हो गया। सोमवार को उनके पैतृक गांव स्थित निराला विद्यालय में मनाई जाएगी। जिसमें साहित्यकार व शिक्षाविद् आएंगे।