मकर संक्रांति के दिन मौसम ने पलटी खाई। पूरे दिन बदली छाई रहने से तेज धूप नहीं निकली। इससे लोगों को फिर से ठंड बढ़ने का अहसास हुआ। इसके चलते अधिकतम व न्यूनतम तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई।
शुक्रवार को सुबह कोहरे से लिपटी रही। सुबह 8 बजे के बाद सूर्यदेव के दर्शन तो हुए लेकिन बादलों की ओट में रहने से तेज धूप नहीं निकल सकी। दिनभर यही स्थिति बनी रही। लोग घरों में ही दुबकने को मजबूर हो गए। दोपहर में कुछ देर के लिए मौसम तो खुला लेकिन आंशिक बदली छाई रहने से लोगों को तेज धूप का अहसास नहीं हुआ। दोपहर में हल्की गति से चली हवाओं ने भी ठंड में इजाफा कर दिया। शाम 4 बजे के बाद ठंड का कहर और बढ़ गया। जैसे ही सूर्यास्त हो गया वैसे ही लोगों को गलन का अहसास होने लगा। इससे लोग बाहर के काम जल्दी-जल्दी निपटाकर घरों को रवाना हो गए। दिनभर घरों में रूम हीटर के साथ ही ग्रामीण इलाकों में आग जलती रही। बच्चों से लेकर बुजुर्ग और युवा भी आग के ही आसपास मौजूद रहकर गर्म होने का प्रयास करते रहे। घरों से बाहर निकले लोग भी खुद को पूरी तरह से गर्म कपड़ों में ढके नजर आए। गुरुवार को जहां अधिकतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस था वहीं शुक्रवार को एक प्रतिशत घटकर 23 रिकार्ड किया गया। न्यूनतम तापमान में 4 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार को न्यूनतम पारा 12 डिग्री था जो शुक्रवार को 8 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया।