गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए सरकार की महत्वाकांक्षी 108 एंबुलेंस सेवा बदहाल हो चली है। हाल यह है कि कुछेक को छोड़ कर ज्यादातर एंबुलेंस में न ही लाइफ सेविंग इंजेक्शन रहते हैं और न ही प्रमुख दवाएं। एंबुलेंस में तैनात मेडिकल टीम बिना मौके पर जरूरी इलाज के मरीजों को सीधे अस्पताल पहुंचा रही है। दो वर्ष पहले प्रदेश में शुरू हुई डायल 108 एंबुलेंस सेवा के तहत जिले को 19 एंबुलेंस मुहैया कराई गई थी। बाद में इनकी संख्या बढ़कर 26 हो गई। एंबुलेंस को लाइफ सेविंग ड्रग्स व मेडिकल टीम के साथ लैस कर स्वास्थ्य विभाग के हवाले किया गया था। शुरुआत दौर में सब कुछ ठीकठाक चला, लेकिन एक वर्ष का समय गुजरते ही अब यह सेवा बदहाल होने लगी। जिले में दो साल से अधिक का समय पूरा करने वाली 108 एंबुलेंस में अब न ही लाइफ सेविंग इंजेक्शन उपलब्ध हैं और न ही बर्न स्प्रे और बीटाडिन जैसी दवाएं। इसके अलावा दो स्वास्थ्य केंद्रों में एंबुलेंस है ही नहीं और आधा दर्जन एंबुलेंस खराब हैं।
केस-1
मौरावां मोड़ पर महरानीखेड़ा गांव के सामने गुरुवार की देर शाम हुई आमने-सामने बाइकों की भिड़ंत में मनोज लोधी, विश्वनाथ व छेद्दू घायल हो गए थे। राहगीरों ने 108 एंबुलेंस पर सूचना दी, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। बचुआखेड़ा से लखनऊ जा रहे पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री सुनील यादव अपने वाहन से घायलों को मौरावां सीएचसी ले गए। यहां डॉक्टरों ने तीनों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
केस-2
शुक्लागंज के भातूफार्म निवासी शिवशंकर शुक्ला की उन्नाव आते समय अचानक तबियत बिगड़ गई। साथ रहे लोगों ने 108 नंबर डायल कर एंबुलेंस को सूचना दी और शिवशंकर को जिला अस्पताल ले जाने लगे। एंबुलेंस में मौजूद मेडिकल टीम ने शिवशंकर को किसी भी तरह की दवा नहीं दी। पूछने पर बताया कि एंबुलेंस में दवाएं खत्म हो गई हैं।
108 एंबुलेंस में यह होनी चाहिए दवाएं
यह दवाएं होनी चाहिए
बर्न स्पे, पेन किलर, बीटाडिन लोशन, कॉटन, लाइफ सेविंग इंजेक्शन, मॉस्क, वीगो, ग्लूकोज, मेट्रोजिल सहित 17 अन्य दवाएं।
जिले में कुल हैं 26 ‘108 एंबुलेंस’
जिले में इस समय 26 ‘108 एंबुलेंस’ संचालित हैं। इसमें तीन जिला अस्पताल, सोलह सीएचसी के अलावा एक आजाद नगर चौराहा, एक बारासगवर थाना, एक दही चौकी, एक तकिया चौराहा सफीपुर, एक चकलवंशी चौराहा, एक नानामऊ घाट, एक लखनऊ बाईपास पर तैनात की गई हैं। इसमें हिलौली व मौरावां स्वास्थ्य केंद्र में तो एंबुलेंस है ही नहीं। एंबुलेंस तीन दिन से कानपुर में बनने के लिए पड़ी है। यहां के मरीजों को 108 एंबुलेंस का लाभ ही नहीं मिल पा रहा है। बांगरमऊ व असोहा सीएचसी पर लगी 108 एंबुलेंस में मेंटीनेंस की कमी है। इससे वह भी सेवाएं पूरी तरह से नहीं दे पा रही हैं।
क्या बोले स्वास्थ्य राज्य मंत्री
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री सुधीर रावत ने कहा कि अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि 108 एंबुलेंस की सुविधा न मिलने की शिकायत आती है तो कार्रवाई अवश्य की जाएगी। बताया कि सरकार की मंशा हर किसी को चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। इसमें किसी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।