आईटीआई पारा में सामान खरीद की जिलास्तर पर कराई गई प्रारंभिक जांच में लाखों का घोटाले मिलने के बाद अब शासन ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की है। टीम में सचिवस्तर के अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। जल्द ही टीम के जिले में आकर जांच शुरू करने की संभावना जताई जा रही है।
आईटीआई प्रशासन द्वारा डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा का सामान खरीदने की जानकारी मिलने पर अगस्त 2016 में सीडीओ ने डीडीओ एनबी सविता से जांच कराई थी। डीडीओ ने जांच की तो लाखों रुपये के घोटाले का मामला प्रकाश में आया। जांच में पता चला कि आईटीआई प्रशासन ने इलेक्ट्रानिक व प्लास्टिक फर्नीचर की खरीदारी में जमकर अनियमितता बरतीं। प्रत्येक सामान का मूल्य प्रिंट रेट से दो-तीन गुना अधिक दर्शाया गया। रैंडम जांच में घोटाला 50 लाख रुपये से ज्यादा होने की आशंका पर तत्कालीन डीएम सौम्या अग्रवाल ने सिटी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय टीम से मामले की जांच कराई थी। सदस्यों ने मौके पर जाकर जांच पड़ताल की और भुगतान संबंधी अभिलेख, बैंक स्टेटमेंट का मिलान किया था।
जिसमें हर सामान की खरीद में प्रिंट धनराशि से डेढ़ से दोगुना तक ज्यादा बिल भुगतान की जानकारी हुई थी। टीम ने महज 70 उपकरणों की ही खरीद प्रक्रिया की जांच की थी। जिसमें लाखों रुपये के सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला प्रकाश में आया था। इस पर सिटी मजिस्ट्रेट ने डीएम को भेजी गई रिपोर्ट में असल घोटाले की धनराशि का पता लगाने के लिए जांच शासनस्तर की विशेष टीम से कराने की संस्तुति की थी। डीएम ने भी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर अब शासन ने जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है। सिटी मजिस्ट्रेट डा. एके सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया है कि शासन से जांच टीम गठित होने की जानकारी उन्हें भी मिली है।
770 उपकरणों की खरीद में 1.75 करोड़ का भुगतान
आईटीआई प्रशासन ने 770 उपकरणों की खरीद की थी। इसमें चार फर्मों ने टेंडर डाला था और सभी को काम भी मिला। इन फर्मों को खरीद के एवज में 1.75 करोड़ रुपये का (आयकर सहित) भुगतान किया गया। इसमें एसी, वाशिंग मशीन, योग मैट, प्लास्टिक स्टूल, इलेक्ट्रानिक प्रेस समेत अन्य उपकरण शामिल रहे। जांच टीम के सूत्रों की मानें, ओनिडा की जो वाशिंग मशीन 11000 रुपये की थी, उसका भुगतान 20000 रुपये किया गया। इसके अलावा 200 से 300 रुपये की कीमत वाला प्लास्टिक का स्टूल 800 रुपये मेें खरीदा गया। योग मैट के लिए 2400 रुपये और इलेक्ट्रानिक प्रेस के लिए 4000 रुपये का भुगतान किया गया। इसी प्रकार अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों की भी खरीद में जमकर धांधली की गई। टीम को बिल में न तो उपकरणों का निर्माण वर्ष लिखा मिला और ना ही ब्रांड का नाम।