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अहंकारी का विवेक क्षीण हो जाता है: राजेश पांडेय

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फतेहपुर चौरासी। नगर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन बुधवार को कथा वाचक आचार्य राजेश पांडेय ने गोवर्धन पर्वत की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि अहंकारी का विवेक क्षीण हो जाता है। इससे वह सही निर्णय न लेकर गलतियां कर पतन की ओर अग्रसर हो जाता है।
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उन्होंने बताया कि गोवर्धन पर्वत की तराई में नाच गाने के साथ खुशियां मनाते गोप गोपिकाओं को देख कृष्ण के पूछने पर गोपियों ने देवराज इंद्र की पूजा की बात बताई। कृष्ण ने समझाया कि गोवर्धन गायों के साथ हम सभी का कल्याण करते हैं।
कन्हैया की बात मानकर सभी गोवर्धन की पूजा करने लगे। अपनी पूजा न होने से देवराज नाराज हो गए। उन्होंने ब्रजवासियों को सबक सिखाने के लिए मेघों को मूसलाधार वर्षा करने का आदेश दे दिया। वर्षा से पीड़ित गोप-गोपियों की पुकार सुनकर श्रीकृष्ण बोले- तुम सब गोवर्धन-पर्वत की शरण में चलो। वह सब की रक्षा करेंगे।
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श्रीकृष्ण ने गोवर्धन को अपनी उंगली पर उठा लिया। गोप-ग्वाले सात दिन तक उसी की छाया में रहकर बारिश से बच गए। यह चमत्कार देखकर इंद्रदेव अपनी मूर्खता पर पश्चाताप हुआ।
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