उन्नाव। अमेरिका की ओर से भारतीय उत्पादों पर लगाए गए भारी भरकम टैरिफ का असर चर्म उद्योग पर भी दिखने लगा है।अमेरिकी कंपनियों ने चमड़े से जुड़े उत्पादों के करीब 500 करोड़ के आर्डर फिलहाल रोक दिए हैं। अकेले उन्नाव की चर्म इकाइयों से हर साल 2000 करोड़ का निर्यात अमेरिका किया जाता है। देश भर की बात जाए तो यह आंकड़ा करीब 10 हजार करोड़ का है।
उद्यमियों का कहना है कि फिलहाल इंतजार करने के सिवाए कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। दूसरे देशों में भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। जिले के औद्योगिक क्षेत्र दही चौकी और बंथर में 52 टेनरियां और चमड़े से बने उत्पाद बनाने वाली बड़ी इकाइयां हैं। करीब 25 चर्म इकाइयों में सैडलरी (घोड़े की काठी) जूते, बैग, जैकेट आदि उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
अमेरिका ने अपने देश में भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। अमेरिका के इस फैसले से जिले में चर्म उत्पाद निर्यातकों में ऊहापोह की स्थिति है। उद्यमियों के अनुसार 100 रुपये कीमत का कोई सामान अगले ही दिन 126 रुपये का हो जाएगा तो उससे निर्यात करने वाले हों या आयात करने वाले, दोनों ही तरह के उद्यमी प्रभावित होंगे। वैसे भी यूएसए में चमड़ा उत्पादों पर सामान्य से 10 फीसदी ज्यादा टैक्स लगता है। अभी यह समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि यूएसए में चमड़ा निर्यात की कितनी संभावनाएं बाकी हैं और टैरिफ से कीमतों पर क्या असर पड़ेगा। फिलहाल अमेरिकी कंपनियों ने करीब 500 करोड़ के आर्डर होल्ड किए हैं। भविष्य क्या होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
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दूसरे देशों पर रख रहे नजर
उत्तर प्रदेश चमड़ा उद्योग संघ उन्नाव चैप्टर के अध्यक्ष मो. ताज आलम ने बताया कि अमेरिका ने दूसरे देशों पर भारत से कहीं ज्यादा टैरिफ लगाया है। हालांकि भारत पर 26 प्रतिशत का टैरिफ लगने से भारतीय माल भी अमेरिका में महंगा होगा लेकिन दूसरे देशों के माल की कीमतें ज्यादा होने से भारत के उत्पादों की मांग वहां के बाजार में बढ़ने की भी उम्मीद है। इससे ज्यादा कीमत पर ही सही पर व्यापार (निर्यात) बढ़ने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। अमेरिका के दम से केवल भारत में ही नहीं दुनिया के दूसरे देशों में ऊहापोह की स्थिति है। आने वाले दिनों में स्थितियां स्पष्ट होंगी।
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रूस-यूक्रेन युद्ध से प्रभावित चमड़ा उद्योग को फिर झटका
कोरोना के बाद फरवरी 2022 से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध से उन्नाव के चमड़ा उद्योग भी झुलसा रहा है। रूस में हर साल औसतन 150 करोड़ और यूक्रेन को हर साल औसतन 10 करोड़ के चर्म उत्पादों का निर्यात होता है। दोनों देशों में चल रहे युद्ध से लगभग दोनों देशों के निर्यात में कमी है।
अमेरिका के टैरिफ का सभी उद्योगों की तरह चमड़ा उद्योग पर भी असर पड़ेगा, एक तह से पूरी चेन प्रभावित होगी। अचानक कीमतें 26 प्रतिशत बढ़ेंगी तो वहां खरीदार भी घटेंगे। हमसे माल खरीदने वाली कंपनियां और उद्यमी भी कम खरीद करेंगे तो उत्पादन भी प्रभावित होगा। हालांकि दूसरे देशों से अमेरिका को निर्यात होने वाला चर्म उत्पाद कितना महंगा होगा, यह भी देखने वाली बात होगी। अन्य देशों के माल की ज्यादा कीमतें भारत के लिए फायदेमंद हो सकती हैं। नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में स्थितियां पूरी तरह साफ हो जाएंगी।
- आरके जालान, अध्यक्ष, चमड़ा निर्यात परिषद