आवासीय व कामर्शियल योजनाओं के लिए जमीनें उपलब्ध न होने से आवास विकास परिषद उन्नाव के पास अब कोई काम नहीं है। भूमि अधिग्रहण के लिए कानून में संशोधन व सर्किल रेट से चार गुना तक मुआवजा देने के प्रावधान ने आविप उन्नाव को एक तरह से बेरोजगार बना दिया है। शहर के पास सिंगरोसी में 582 हेक्टेयर जमीन पर आवासीय व व्यवसायिक योजना विकसित करने का प्रोजेक्ट किसानों के विरोध के चलते वापस लेना पड़ा। जमीन न मिलने और कानून की जटिलता से परेशान आवास विकास ने यहां अपने कार्यालय को बंद करने का फैसला लिया है। विभाग के जेई बताते हैं कि उन्नाव में कोई काम न होने से विभाग अपने उन्नाव कार्यालय का कानपुर कार्यालय में विलय करेगा।
शहर में पहली बार वर्ष 1976 में 70 एकड़ में 2100 आवासीय योजना विकसित करने वाली आवास विकास परिषद को इसके बाद से जिले में जमीन का कोई टुकड़ा नहीं मिला। तमाम कवायदों के बाद 2010 में विभाग ने शहर में लखनऊ-कानपुर हाईवे व उन्नाव रायबरेली मार्ग के साथ ही उन्नाव-शुक्लागंज मार्ग से संपर्कित सिंगरोसी व आसपास के गांवों की 582 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रण का प्रस्ताव पास कराया। परिषद ने किसानों को धारा-4 के तहत भूमि अधिग्रहण की नोटिस भी दे दी। लेकिन इसके बाद किसानों के विरोध के चलते मामला अटक गया। इधर भूमि अधिग्रहण के कानून में सख्ती और सर्किल रेट से चार गुना तक मुआवजा देने के नियम से आवास विकास परिषद ने अपने कदम खींच लिए हैं।
पिछले दिनों आवास विकास परिषद की बोर्ड बैठक में उन्नाव समेत कई अन्य जिलों के इस मुद्दे को रखा गया। इसके बाद से आवास विकास ने उन्नाव कार्यालय को बंद करने का फैसला ले लिया है। उन्नाव के आफिस का कानपुर आवास विकास आफिस में ही विलय कर दिया जाएगा। अगर भविष्य में उन्नाव जिले में किसी आवासीय या व्यवसायिक योजना को विकसित करने पर विचार होता भी है तो उसका क्रियान्वयन कानपुर आवास विकास ही करेगा।
जेई अनिल कुमार शुक्ला ने बताया कि उन्नाव ऑफिस बंद करने की प्रक्रिया चल रही है। अधिकांश अभिलेख, फर्नीचर व अन्य सामान कानपुर शिफ्ट कर दिया गया है।