उन्नाव। जिला महिला और पुरुष अस्पताल में आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम तक नहीं हैं। हाल यह है कि 12 बेड के एसएनसीयू और जनरल वार्डों तक में छह किलो का सिर्फ एक-एक अग्निशमन यंत्र है। ऐसे ही हाल इमरजेंसी, ट्रामा सेंटर, डायग्नोस्टिक सेंटर, बर्न यूनिट आदि के भी हैं। झांसी जैसा हादसा हुआ तो संसाधन की कमी से बड़ा नुकसान होने की आशंका है।
आग से बचाव और उसे बुझाने के लिए महिला और पुरुष अस्पताल में एक-एक करोड़ की लागत से अत्याधुनिक फायर फाइटिंग सिस्टम लगाया जा रहा है, लेकिन तय समय सीमा के तीन महीने बाद भी काम पूरा नहीं हो सका है। हालत यह है कि नवजात बच्चों के एसएनसीयू में भी छह किलो का एक अग्निशमन यंत्र यानी सिलिंडर ही सराहा है।
जिला महिला और पुरुष अस्पताल में रोजाना दो हजार से अधिक मरीज रोजाना ओपीडी में पहुंचते हैं। एसएनसीयू में इस समय 10 नवजात भर्ती हैं। इनके अलावा, दो जनरल वार्डों में दो, इमरजेंसी वार्ड में दो, ट्रामा सेंटर में दो, डायग्नोस्टिक ब्लॉक में एक, बर्न यूनिट में एक, लेबर रूम में एक, एनआरसी में एक, डायलिसिस वार्ड में एक और ओपीडी में भी आग बुझाने वाला एक ही सिलिंडर उपलब्ध है।
महिला, पुरुष वार्ड और इमरजेंसी वार्ड में 270 मरीजों को भर्ती करने के व्यवस्था है। इसके अलावा पोषण पुनर्वास केंद्र में आठ बेड हैं। स्थिति यह है कि जिला और पुरुष अस्पताल में आग बुझाने की व्यवस्था आग बुझाने के 18-18 सिलिंडर के भरोसे है, जिनमें प्रत्येक का वजन छह किलोग्राम है। अब इतने छोटे सिलिंडर से आग पर किस हद तक काबू पाया जा सकता है इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
इनसेट-
झांसी मेडिकल कॉलेज की घटना के बाद निर्देश जारी
झांसी मेडिकल काॅलेज की घटना के बाद शासन ने सभी अस्पतालों में हर हाल में आग से बचाव के इंतजाम करने के निर्देश जारी किए हैं। जिला अस्पताल में फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने का काम सितंबर 2023 में शुरू हुआ था और अगस्त 2024 तक पूरा करने की समय सीमा तय की गई थी। लेकिन तीन महीने बाद भी काम अधूरा है। शनिवार को अग्निशमन अधिकारी और महिला अस्पताल की सीएमएस ने निर्माण एजेंसी को जल्दी काम करने के लिए पत्राचार किया। हालांकि उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन के लोग आधुनिक सिस्टम को लगाने का काम तीन से चार महीने में पूरा होने की बात कह रहे हैं।
सभी वार्डों में बिछाई जा रहीं पाइप लाइनें
अस्पताल की ओपीडी, बर्न यूनिट, वार्ड एक, वार्ड दो, ट्रामा सेंटर, ब्लड बैंक, पैथालॉजी,ऑपरेशन थियेटर आदि में पाइप लाइन बिछाई जा रही है। इसके अलावा सभी वार्डों में सेंसर भी लगाए जाएंगे। इससे आग लगने पर जल्द ही काबू पा लिया जाएगा। वहीं, पानी आपूर्ति के लिए बोरिंग भी कराई गई है।
बिना फायर एनओसी के पांच नर्सिंग होम
जिले में 113 नर्सिंग होम का संचालन हो रहा है। इसमें से 108 को एनओसी दे दी गई है। जबकि पांच संचालकों ने आवेदन किया था, लेकिन निरीक्षण उनके अस्पताल का क्षेत्रफल कम होने पर उन्हें अभी एनओसी नहीं दी गई। उन्हें पेंडिंग में रखा गया है। क्षेत्रफल बढ़ाने पर एनओसी दी जाएगी।
क्या बोले जिम्मेदार
फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने का काम चल रहा है। काम जल्दी पूरा करने के लिए निर्माण एजेंसी से पत्राचार भी किया गया है। एक लाख लीटर की क्षमता के टैंक का निर्माण भी कराया जा रहा है। इसी टैंक से पाइप लाइन में कनेक्शन दिया जाएगा। जो ऑटो मोड पर सेंसर के माध्यम से संचालित होगा।
- डॉ. फौजिया अंजुम, सीएमएस, महिला जिला अस्पताल
जिला अस्पताल में फायर फाइटिंग सिस्टम का काम पूरा न होना चिंताजनक है। इसके लिए कार्यदायी संस्था से पत्राचार किया गया है और जल्द काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा सभी निजी अस्पतालों में निरीक्षण के बाद ही एनओसी दी गई है। सभी अस्पतालों में दो निकास द्वार बनवाए गए हैं। ताकि किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को आसानी से बाहर निकाला जा सके।
शिवराम यादव, जिला अग्निशमन अधिकारी
ये हैं अग्नि सुरक्षा के मानक
- धुआं निकासी के लिए दरवाजा होनी चाहिए, हर मंजिल पर कम से कम एक स्मोक अलार्म होना चाहिए।
- इमारत के किसी भी कमरे में ईंधन जलाने वाले उपकरण होने पर कार्बन मोनो ऑक्साइड डिटेक्टर भी लगाया जाना चाहिए।
- एक मीटर चौड़ा रास्ता होना चाहिए।
- आग लगने पर भागने वाले रास्ते का दरवाजा बिना चाबी से खोला जाने वाला होना चाहिए।
- धूम्रपान करने पर प्रतिबंध होना चाहिए।