हसनगंज। हसनगंज तहसील के गांव गजफ्फर नगर निवासी युवक में स्क्रबटाइफस की पुष्टि के बाद डॉक्टर के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम मरीज के घर पहुंची। मरीज के पांच परिजन सहित आसपास घरों में रहने वाले 58 लोगों की स्लाइड बनाई गई। वहीं 11 लोगों के सैंपल लिए गए। पंचायत विभाग ने सफाई कर्मी को भेजकर चूहा मार दवा का छिड़काव कराया।
गजफ्फर नगर निवासी अनिल कुमार (42) किडनी की बीमारी से पीड़ित है। 14 नवंबर को हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उसे लखनऊ के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया था। बुखार आने पर दो दिन पहले डॉक्टरों ने ब्लड सैंपल की जांच कराई थी। बुधवार को आई रिपोर्ट में स्क्रबटाइफस की पुष्टि हुई। गुरुवार को सीएचसी से डॉ.
आलिम अब्बास के नेतृत्व में लैब टेक्नीशियन सुभाष, सुपरवाइजर छोटेलाल व बेसिक हेल्थ वर्कर रोहित मरीज के घर पहुंचे। मरीज की पत्नी, बेटी, बेटे व मामा सहित आसपास घरों से 11 सैंपल लिए। वहीं डेंगू व मलेरिया
जांच के लिए 58 लोगों की स्लाइड बनाई गई है। ग्राम प्रधान सुनील व पंचायत सचिव मृगांक गौतम ने सफाई कर्मचारी से घर के आसपास सफाई कराई और चूहा मार दवा का छिड़काव करवाया। सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश ने बताया कि स्क्रबटाइफस जांच के लिए लिए गए सैंपल लखनऊ के राममनोहर लोहिया अस्पताल भेजे जाएंगे।
सीएमओ कार्यालय के एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. रवी यादव ने बताया कि स्क्रबटाइफस वायरस जीका व डेंगू से अधिक खतरनाक है। इसका असर सीधे दिमाग पर पड़ता है। यदि किसी को बुखार के साथ चक्कते पड़ते हैं तो वह तत्काल डॉक्टर से मिले और जांच कराए।
पिस्सू के काटने के दो हफ्ते के अंदर मरीज को तेज बुखार (102-103 डिग्री फारेनहाइट), सिरदर्द, खांसी, मांसपेशियों में दर्द व शरीर में कमजोरी आने लगती है। काटने वाली जगह पर फफोलेनुमा काली पपड़ी जैसा निशान दिखता है। समय रहते इलाज न हो तो यह निमोनिया का रूप ले सकता है। मरीजों में लिवर व किडनी ठीक से काम नहीं करतीं। प्लेटलेट्स कम होने से कमजोरी आती है दिमाग पर असर पड़ता है।
पिस्सू के काटने के निशान को देखकर रोग की पहचान होती है। ब्लड टेस्ट के जरिए सीबीसी काउंट व लिवर संबंधी टेस्ट कराएं। एलाइजा व इम्युनोफ्लोरेसेंस टेस्ट से स्क्रबटाइफस एंटीबॉडी का पता लगाते हैं। इसके लिए 7-14 दिनों तक दवाओं का कोर्स चलता है। इस दौरान मरीज कम तला-भुना व तरल पदार्थ लें। कमजोर इम्युनिटी
या जिन लोगों के घर के आसपास यह बीमारी फैली हुई है। उन्हें डॉक्टर हफ्ते में एक बार जरूर देखें। कपड़ों और बिस्तर पर परमेथ्रिन और बेंजिल बेंजोलेट का छिड़काव कराएं। पार्क या पेड़ पौधों के पास जाएं तो पहले पूरी बांह के कपड़े पहनकर जाएं।