उन्नाव। ठंड बढ़ते ही खस्ताहाल सेवाओं के कारण यात्रियों ने रोडवेज बसों के सफर से दूरी बना ली है। पर्याप्त यात्रियों के न आने से रोडवेज को आर्थिक रूप से तगड़ा झटका लगा है।
विभाग को प्रतिदिन दो लाख रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है। लाख कवायद के बाद भी बस अड्डे का सन्नाटा नहीं टूट रहा है।
मौजूदा समय में रोडवेज के बेड़े में 70 बसें हैं। अधिकतर बसों की हालत खस्ताहाल है। किसी में शीशे नहीं हैं तो किसी में फॉग लाइट की व्यवस्था नहीं है।
शीशे न होने के कारण बस में यात्रा के दौरान बर्फीली हवाएं सीधे अंदर घुसती हैं। ऐसे में बस के अंदर बैठा यात्री इस हवाओं से ठिठुर जाता है। कुर्सियों में लकड़ी बाहर झांक रही हैं।
कुशन पूरी तरह से गायब हो चुका है। इस ठंड के मौसम में रोडवेज बस का सफर लोगों के लिए मुसीबतों भरा साबित हो सकता है। शायद इसी कारण लोगों ने बस का सफर करने से तौबा कर ली है। यात्री बसों की बजाए ट्रेनों व अन्य साधनों से सफर करना ज्यादा मुनासिब समझ रहे हैं।
इसी कारण बसों से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में खासी कमी आई है। पर्याप्त यात्री न मिलने से बसों के फेरों के डीजल का भी खर्च नहीं निकल पा रहा है। इसके चलते रोडवेज प्रशासन को प्रतिदिन करीब 2 लाख रुपये का चूना लग रहा है। वैसे जानकार इसके पीछे कोहरे को भी एक प्रमुख कारण बता रहे हैं।
विभाग से मिले आंकड़ाें के अनुसार, ठंड का मौसम आने से पहले जहां रोडवेज विभाग को लगभग प्रतिदिन आठ लाख रुपये की आय होती थी वहीं अब यह घटकर लगभग 6 लाख रुपये प्रतिदिन रह गई है। दो लाख रुपये का घाटा होने से विभागीय अधिकारियों को वार्षिक लक्ष्य पूरा करने में दिक्कतें आ सकती हैं।