अचलगंज/असोहा। सास प्रधान तो बहू जिला पंचायत सदस्य बन गई। मां और बेटा क्षेत्र पंचायत सदस्य बने हैं। इसकी क्षेत्र में काफी चर्चा हो रही है।
सिकंदरपुर कर्ण की चपरी सैदपुर की रहने वाली रजाना ने प्रधान पद पर जीत दर्ज की है। रजाना की बहू सीमा रावत जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुई हैं। रजाना ने प्रतिद्विंदी रामखेलावन को 119 मतों से शिकस्त दी। रजाना के पति पूर्व में ग्राम प्रधान रह चुके हैं। पांच बार गांव की प्रधानी इनके परिवार में ही रही। सपा समर्थन से चुनावी मैदान में उतरी बहू सीमा रावत ने भाजपा समर्थित नंदिनी चौधरी को 2060 मतों से पराजित किया। वहीं प्रसपा के जिला प्रमुख महासचिव बीतेंद्र प्रताप सिंह वार्ड संख्या 24 केवनी से और उनकी माता सोमवती वार्ड संख्या 22 से बीडीसी निर्वाचित हुई हैं। चचेरी भाभी शशि यादव गोसाईंखेड़ा से प्रधान चुनी गई हैं। शशि के पति सूर्यभान यादव निवर्तमान प्रधान थे। राजनीतिक गलियारों में असोहा ब्लाक से बीतेंद्र के प्रमुख पद के उम्मीदवार होने की चर्चा है। बीतेंद्र के पिता बृजभूषण सिंह कनिष्ठ प्रमुख रह चुके हैं।
असोहा। कालूखेड़ा निवासी डॉ. शकील हिलौली तृतीय सीट से जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए हैं। शकील ने अपने प्रतिद्विंदी छोटेलाल को पराजित किया। शकील इससे पहले असोहा द्वितीय सीट से लगातार चार बार जिला पंचायत सदस्य चुने जा चुके हैं। वहीं इस बार असोहा प्रथम से डॉ. शकील ने अपनी पत्नी नमीमुल निशा को भी राजनीति में उतारा था। नमीमुल निशा भी असोहा प्रथम जिला पंचायत सीट से बिना एक भी दिन दौरा किए पांच सौ मतों से जीत गईं। नमीमुल ने प्रतिद्विंदी मोनू यादव को पराजित किया।
------
फोटो-30 -अमरेश पटेल।
चौथी बार प्रधान बने अमरेश पटेल
गंजमुरादाबाद। ग्राम पंचायत जगटापुर से चौथी बार 98 मतों से प्रधानी में जीत हासिल की है।
ग्राम पंचायत जगटापुर में वर्ष 2000 में अमरेश पटेल ने पहली बार प्रधान पद के लिए ताल ठोंकी थी। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी चंद्र पाल यादव को 65 वोटों से शिकस्त देकर जीत दर्ज की। 2005 में भी अमरेश पटेल ने 165 मतों से अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सर्वेश कटियार को हराया था। वर्ष 2010 में अमरेश पटेल ने तीसरी बार फिर भाग्य आजमाया और जनता ने सेवा करने का मौका दिया। 2015 में अशोक कटियार ने अमरेश पटेल को 51 मतों से हरा दिया था। इस बार फिर अमरेश पटेल ने अशोक कटियार को 98 वोटों से हराकर प्रधानी की कुर्सी पर कब्जा कर लिया। (संवाद)
---
प्रत्याशी पर भारी पड़े जीत-हार के 24 घंटे
सफीपुर। भाजपा समर्थित जिला पंचायत सदस्य तृतीय से दिलीप मिश्रा ने 24 घंटे चली ऊहापोह की स्थिति के बाद क्षेत्र की तीन सीटों में एक जीत कर भाजपा की साख बचाई। दिलीप मिश्रा को भाजपा ने जिला पंचायत सदस्य तृतीय सीट से समर्थित प्रत्याशी घोषित किया था। प्रतिद्वंद्वी बृजकिशोर के पोलिंग एजेंट द्वारा मतगणना में लिखे गए मतों में भ्रम के चलते 24 घंटे जीत-हार को लेकर असमंजस की स्थिति रही। मंगलवार सुबह 10 बजे दिलीप मिश्रा की जीत घोषित हुई। उनके अलावा भाजपा समर्थित अन्य दो प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा। (संवाद)
---
भ्रम की स्थिति से विनर, रनर रहे परेशान
बांगरमऊ। सोमवार देर रात जिला पंचायत सदस्य की मतगणना के बाद बांगरमऊ द्वितीय क्षेत्र से चुनाव परिणाम को लेकर भ्रम की स्थिति रही। द्वितीय क्षेत्र से सपा समर्थित अंजर अहमद और मुकेश पाल चुनाव लड़ रहे थे। वैसे सपा प्रत्याशी अंजर अहमद ने मुकेश पाल को 600 मतों से हरा दिया था लेकिन समर्थकों ने सोशल मीडिया पर अंजर की हार और मुकेश की जीत वायरल कर दी। मंगलवार सुबह सीडीओ ने जब अंजर अहमद को जीत का प्रमाणपत्र दिया तब कहीं जाकर भ्रम समाप्त हुआ।
---
दूसरे वार्ड में वोटों की गिनती करने की शिकायत
पुरवा। असोहा ब्लाक के रसीदपुर मेदपुर वार्ड संख्या 49 से चुनाव लड़ने वाले ग्राम मेदपुर के अवधेश, फूलचंद्र, शारदा प्रसाद ने डीएम को शिकायतीपत्र दिया। बताया कि वह सब वार्ड 49 से चुनाव लड़े थे। मतगणना में अधिकारियों ने रायपुर के वार्ड 1 व 2 के वोट वार्ड 50 में गिनती कर दिया। ये दोनों वार्ड 49 के हिस्सा थे। इसकी शिकायत किया तो रिटर्निंग आफिसर ने मत खोजने की बात कही लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। सभी ने डीएम से मामले की जांच कराने की मांग की है।
----
पुत्र के प्रधान बनने की खुशी में हृदयगति रुकने से मौत
सफीपुर। लंबे इंतजार के बाद ग्राम प्रधान पद पर पुत्र की जीत की खुशी से पिता की हृदयगति रुकने से मौत हो गई।
विकासखंड की ग्राम पंचायत देवगनमऊ में आजादी के बाद से लंबे समय तक मिश्रा परिवार का ही कब्जा रहा। पंचायतों में आरक्षण व्यवस्था लागू हो जाने के बाद प्रधान पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होता रहा जिसके चलते इस परिवार में प्रधान नहीं बन सका। इस बार परिवार के दिलीप मिश्र ने चुनाव लड़ा एवं दशकों बाद फिर से प्रधान पद पर विजय प्राप्त की। पुत्र के प्रधान निर्वाचित होने पर पिता कीर्ति प्रकाश मिश्रा जो दशकों से बांगरमऊ नगर में रह रहे थे, अपने पैतृक गांव वापस आए थे। जीत के बाद खुशी के माहौल में सोमवार घर पर आए समर्थकों का आभार जताने के बाद देर शाम वह बांगरमऊ जाने के लिए निकलने वाले थे कि अचानक उनकी तबियत बिगड़ गई। परिजन चिकित्सकों के पास ले गए। वहां पर ह्नदयगति रुकने से मौत की पुष्टि की। जिस घर में प्रधान बनने की शुभकामनाएं देने वालों का तांता लगा था, उसी घर में संवेदना व्यक्त करने वालों की भीड़ जमा हो गई। (संवाद)