उन्नाव। जिले में 55 दिन में 1242 लोगों को टीबी की पुष्टि हुई है। यह मरीज सामान्य खांसी, जुकाम समझकर अपना इलाज करा रहे थे। लेकिन जब इनकी जांच की गई तो पता चला इन्हें टीबी है। जिला क्षय रोग नियंत्रण विभाग की ओर से इन सभी मरीजों के बलगम का नमूना लिया गया और टीबी का लेवल पता करने के लिए भेजा गया है।
जिले में एक जनवरी से 100 दिवसीय क्षय रोग खोजी अभियान चलाया जा रहा है। इसमें दो सप्ताह से अधिक खासी वाले, सीने में दर्द, बुखार, लगातार वजन कम होना, अधिक नशा करने वाले, 60 साल से ऊपर, टीबी रोगियों की देखभाल करने वाले, मलिन बस्ती में रहने वाले, एचआईवी संक्रमित आदि 5.98 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इसके बाद संभावित लक्षणों वाले लोगों के बलगम का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा गया। वापस आई जांच रिपोर्ट में जिले के 1242 लोगों में टीबी की पुष्टि हुई। अब इन मरीजों के टीबी का लेवल पता किया जा रहा है। जिस लेवल की टीबी होगी, उसी आधार पर इन मरीजों का इलाज चलेगा।
छह महीने चलता इलाज
सामान्य क्षय रोगियों को छह माह तक इलाज की जरूरत होती है। वहीं, एमडीआर (गंभीर) मरीजों का नौ से 11 माह तक, इसके साथ ही (एक्सडीआर) अति गंभीर क्षय रोगियों का इलाज 18 से 20 माह तक चलता है। जो पूरी तरह निशुल्क है। इसके अलावा सरकार की ओर से टीबी मरीजों को 500 रुपये प्रतिमाह पोषण के लिए दिया जाता है।
कोट
दिसंबर 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का सरकार का लक्ष्य है। इस पर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तेजी से कार्य कर रहा है। टीबी रोगियों का सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क इलाज किया जाता है। सभी स्वास्थ्य कर्मी क्षय रोग के प्रति लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं। टीबी संक्रमित मिले मरीजों का शुरुआती इलाज शुरू करा दिया गया है।
- डाॅ. मनीष मिश्रा, जिला उप क्षय रोग अधिकारी