मुख्यमंत्री के आह्वान पर जनप्रतिनिधियों ने डेढ़ साल पहले अस्पतालों को गोद लिया था। तब वादा किया था कि अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं में सुधार किए जाएंगे। अस्पताल में जांच के लिए आधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी और स्टॉफ की तैनाती कराई जाएगी, लेकिन इतने समय बाद भी गोद लिए गए स्वास्थ्य केंद्रों का हाल जस का तस है। एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और ईसीजी के लिए मरीजों को निजी पैथालॉजी का सहारा लेना पड़ रहा है। हालात ये हैं कि चिकित्सा उपकरणों की कौन कहे अस्पताल में मरीजों और तीमारदारों के लिए पीने के पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
सफीपुर। तहसील क्षेत्र की करीब दो लाख आबादी की सेहत दुरुस्त रखने के लिए जिम्मेदारी उठाने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को पूर्व हज एवं वक्फ राज्यमंत्री मोहसिन रजा ने गोद लिया था। उन्होंने सीएचसी में 24 बेड का मिनी ट्रॉमा सेंटर, उपकरण और परिसर के लिए 1.50 करोड़ खर्च कर सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया था। विधान परिषद सदस्य निधि से ट्रॉमा सेंटर निर्माण के लिए 80 लाख और जांच मशीनें खरीदने के लिए 40 लाख रुपये भी दे दिए थे, लेकिन मरीजों को इसका लाभ नहीं मिला।
सीएचसी आने वाले मरीजों को आज भी अल्ट्रासाउंड, एक्सरे और ईसीजी के लिए हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। सफाई के लिए सिर्फ एक सफाई कर्मी की तैनाती है। सफीपुर के साल्हेनगर निवासी रुचि पेट में दर्द होने पर सीएचसी डॉक्टर को दिखाने आई थीं। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड की सलाह दी, लेकिन अस्पताल में सुविधा नहीं है।
इस पर उन्हें 600 रुपये में बाहर से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ा। उनका कहना था कि यदि सीएचसी में सुविधा होती तो अतिरिक्त रुपये न खर्च करने पड़ते। इस संबंध में पूर्व राज्यमंत्री मोहसिन रजा ने बताया कि जिस स्थान पर मिनी ट्रॉमा बनना था, वहां 20 बेड का कोविड वार्ड का निर्माण कराया जा रहा है। वार्ड बनने के बाद उसके पास मिनी ट्रामा सेंटर बनेगा। छह महीने में अन्य उपकरण आ जाएंगे। इमरजेंसी वार्ड भी बनकर तैयार हो जाएगा और जांच मशीनें भी उपलब्ध होंगी।
सफीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर रोजाना 20 से 25 मरीज ऐसे आते हैं। इसमें गर्भवती भी होती हैं, जिन्हें अल्ट्रासाउंड की जरूरत पड़ती है। यहां अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने से बाहर से अल्ट्रासाउंड कराना मजबूरी है। शुक्रवार को सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश ने सीएचसी का निरीक्षण किया। यह समस्या देख कालूखेड़ा पीएचसी के प्रभारी डॉ. तपन रजा को अल्ट्रासाउंड के लिए नियुक्त किया है। इससे मरीजों को अल्ट्रासाउंड सुविधा की आस जगी है।
भगवंतनगर। सुमेरपुर ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भगवंतनगर के आसपास की आबादी करीब 15 हजार है। यहां के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, इसके लिए पीएचसी को पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ने गोद लिया था। सफाई के साथ भवन का रंग रोगन किया गया था। लोगों को उम्मीद थी कि अब स्वास्थ्य सेवा पटरी पर आएगी, लेकिन यहां के भी हालत नहीं बदले। पीएचसी में रोजाना औसतन 20 मरीज आते हैं।
अस्पताल में जांच की कोई सुविधा नहीं है। इससे मरीजों को निजी पैथालॉजी का सहारा लेना पड़ रहा है। यहां का हैंडपंप भी खराब पड़ा है। भगवंतनगर कस्बा निवासी जितेंद्र मिश्रा बेटे नयन को बुखार और पेट दर्द होने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाए। डॉक्टर ने खून की जांच लिखी। पैथोलॉजी में जांच की सुविधा न होने पर बाहर से जांच कराने के लिए कहा।
इस पर उन्होंने निजी पैथालॉजी से खून की जांच कराई। पीएचसी प्रभारी डॉ. नरेंद्रकृष्ण ने बताया कि अभी हाल ही में डॉ. राजकिशोर की तैनाती हुई है। अब मरीजों की संख्या बढ़ने की उम्मीद जगी है। जांच के लिए जो भी आवश्यकता है उसके लिए सीएमओ को पत्र भी भेजा जा चुका है। भगवंतनगर विधायक आशुतोष शुक्ला ने बताया कि क्षेत्र के लोगों को पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएं मिलें, इसके लिए वह लगातार प्रयास कर रहे हैं। डॉक्टर की तैनाती हो गई है। उपकरणों को लिए स्वास्थ्य निदेशक को भी पत्र भेजा है। दो महीने में सुधार होगा।
सफीपुर सीएचसी में शोपीस बनी अल्ट्रासाउंड मशीन। संवाद- फोटो : UNNAO