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बिछिया की दो ग्राम पंचायतों में अफसर फिर चलाएंगे प्रधानी!

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उन्नाव। बिछिया विकासखंड की दो ग्राम पंचायतों में इस बार प्रधानी के चुनाव पर संकट के बादल मंडराते दिख रहे हैं। इन दोनों ग्राम पंचायतों को शासन की ओर से अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित किया गया है, जबकि एसटी वर्ग के लोगों के पास संबंधित जाति का प्रमाणपत्र ही नहीं है। इसी कारण यहां पर उपचुनाव के लिए कोई भी नामांकन दाखिल नहीं हुआ है।
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विकासखंड बिछिया की दो ग्राम पंचायतें तौरा व मऊ सुल्तानपुर की प्रधानी सीट अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित हैं। यानि इन सीटों पर एसटी वर्ग का ही व्यक्ति चुनाव लड़ सकता है। इन सीटों पर पेंच इस बात को लेकर फंसा हुआ है कि दोनों ही गांवों में एसटी वर्ग के लोगों के पास संबंधित जाति प्रमाणपत्र नहीं है। नियमानुसार, नामांकन आरक्षित वर्ग के लोगों को जाति प्रमाणपत्र भी जमा करना होता है। सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन का मानना है कि जनपद में एसटी वर्ग के लोग ही नहीं हैं। ऐसे में उनका जाति प्रमाणपत्र नहीं बनाया जा सकता है। इसी कारण 2015 में हुए चुनाव के दौरान कोई भी प्रत्याशी जाति प्रमाणपत्र दाखिल नहीं कर सका था। इसकी वजह से यह सीटें तब से रिक्त चल रही थीं। प्रशासन ने पंचायत सचिव को बतौर प्रशासक नियुक्त कर दिया था। इधर, चुनाव आयोग ने उपचुनाव की घोषणा की तो इन सीटों के लिए चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू हुई। यहां पर प्रमाणपत्र को लेकर पेंच फंस गया और कोई पर्चा दाखिल करने ही नहीं पहुंचा। अब भविष्य में भी इन दोनों ग्राम पंचायतों के खाली रहने की संभावना बढ़ गई है। किसी के भी पास जाति प्रमाणपत्र न होने के कारण इन दोनों गांवों में प्रधानी का चुनाव होना मुश्किल लग रहा है। ऐसे में तौरा व मऊ सुल्तानपुर गांव में विकास कार्यों के लिए पंचायत उपचुनाव के बाद प्रशासक नियुक्त हो सकते हैं।
नट बिरादरी के लोगों ने खुद को बताया था थारु जाति का
तौरा व मऊ सुल्तानपुर में काफी संख्या में नट बिरादरी के लोग रहते हैं। वर्ष 2011 में हुई जनगणना के दौरान इन लोगों ने खुद का नाम थारु जाति में दर्ज कराया था। इस आधार पर इन्हें एसटी वर्ग में मान लिया गया था और शासन ने इनकी खासी संख्या को देखते हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2015 में दोनों ग्राम पंचायतों को एसटी वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया था। बस मामला यहीं फंस गया था, जो आज तक सुलझ नहीं सका है।
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निदेशक पंचायतीराज को भेजेंगे पत्र
वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर दो ग्राम पंचायत सीटें एसटी कोटे में चली गईं थीं। इस मामले में जिलाधिकारी के माध्यम से निदेशक पंचायतीराज को पत्र भेजा जाएगा। संभ इस बार के पंचायत चुनाव में सीट का आरक्षण बदल सकता है।
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-राजेंद्र यादव, जिला पंचायतराज अधिकारी।
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