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धान खरीद का भुगतान 24 घंटे में होगा

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उन्नाव। प्रदेश सरकार ने धान खरीद में बिचौलियों का काम समाप्त करने के लिए भुगतान में सख्ती कर दी है। शासन ने पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन भुगतान की पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) लागू कर दी है। पहले चरण में यह व्यवस्था विपणन विभाग (मार्केटिंग) के क्रय केंद्रों पर शुरू की गई थी। अब इसे सभी खरीद एजेंसियों के लिए लागू कर दिया गया है। केंद्रों पर उपज बेचने वाले किसानों को 24 घंटे में भुगतान मिल सकेगा। शर्त यह रहेगी कि किसान को खतौनी व बैंक खाते की डिटेल शत-प्रतिशत सही देनी होगी।
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जिले में एक नवंबर से सरकारी धान खरीद शुरू हुई है। यह 15 फरवरी तक चलेगी। धान खरीद के लिए खोले गए 28 क्रय केंद्रों में सबसे ज्यादा पीसीएफ के 12 क्रय केंद्र हैं। दूसरे नंबर पर विपणन विभाग के 6 और एसएफसी के 5 केंद्र खोले गए हैं। यूपीस्टेट एग्रो व यूपीएसएस के 2-2 और एफसीआई के 1 केंद्र पर धान खरीद हो रही है। शासन ने धान के लिए कॉमन के 1815 रुपये और ए ग्रेड के लिए 1835 रुपये प्रति क्विंटल का रेट तय किया है। इसके अलावा 20 रुपये छनाई आदि के अतिरिक्त मिलेंगे। जिसकी वापसी किसानों को धान के भुगतान में कर दी जाएगी। प्रदेश की योगी सरकार ने अब खरीद में ही पीएफएमएस व्यवस्था लागू कर दी है। इससे स्थानीय स्तर पर भुगतान देने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। इससे क्रय केंद्रों पर उपज बेचने वाले किसानों को मात्र 24 घंटे में भुगतान मिल जाएगा। अब भुगतान लखनऊ मुख्यालय से होगा। अभी तक यह व्यवस्था केवल विपणन विभाग के क्रय केंद्रों पर ही लागू थी।
अभी तक किसानों को भुगतान की जो व्यवस्था चल रही है उसमें प्रत्येक क्रय केंद्र प्रभारी को एक अलग खाता खुलवाना पड़ता है। शासन से उनके खाते में पैसा भेजा जाता है। केंद्र प्रभारी अपने खाते से किसानों के खाते में आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान भेजते हैं। 72 घंटे में खाते में पैसा पहुंचाने की बाध्यता है। हालांकि इस व्यवस्था में काफी झोल हैं। यदि किसान का खाता नहीं है तो उसके बताए अनुसार रिश्तेदार या अन्य किसी के खाते में पैसा भेज दिया जाता है।
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जिला खाद्य विपणन अधिकारी राजीव कुलश्रेष्ठ ने कहा कि नई व्यवस्था में केवल उसी किसान के खाते में ही पैसा भेजा जाएगा जिसके नाम खतौनी है। खतौनी में जो नाम चढ़ा होगा वहीं नाम का बैंक खाता भी होना चाहिए। यदि बैंक और खतौनी में अलग-अलग नाम होगा तो भुगतान नहीं दिया जाएगा। किसान को खतौनी के नाम का ही खाता लगाना होगा।
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