उन्नाव। मुंबई से गोरखपुर जा रहे डीसीएम सवार 25 मजदूरों में एक की मौत ने अजगैन थाना के एक इंस्पेक्टर व दरोगा समेत 15 पुलिस कर्मियों को मुश्किल में डाल दिया है। पुलिस कर्मियों ने नवाबगंज टोल प्लाजा पर डीसीएम को रोका था। बाद में मृतक व उसके परिजनों को शव वाहन से गोरखपुर भेजने में मदद की थी। गोरखपुर मृतक के दो परिजनों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आने के बाद अजगैन थाना के एक इंस्पेक्टर, तीन दरोगा सहित 15 पुलिस कमियों को सरस्वती मेडिकल कॉलेज में आइसोलेट किया गया है। सभी का सैंपल जांच के लिए भेजा जा रहा है।
गोरखपुर के बेलीपार थाना क्षेत्र के कटिया गांव निवासी हीरालाल यादव (45) पुत्र मनीराज अपने चचेरे भाई अमरनाथ व गांव के अन्य लोगों के साथ मुंबई के सांताक्रूज में एक पेंट की दुकान में नौकरी करता था। लॉक डाउन के बाद सभी मुंबई में फंस गए थे। 8 मई शुक्रवार को हीरालाल व उसके चचेरे भाई समेत गोरखपुर व आजमगढ़ के 27 लोग घर जाने के लिए पैदल निकले। 70 किमी पैदल चलने के बाद पिकअप से वह नासिक पहुंचे। यहां सभी ने घर जाने के लिए 2600 रुपये प्रति सवारी पर डीसीएम बुक की। शनिवार देर शाम झांसी में डीसीएम रुकने पर हीरालाल को सांस लेने में दिक्कत होने के साथ सिर में दर्द शुरू हो गया। दवा दिलवाने के बाद सभी डीसीएम से गोरखपुर के लिए निकले। उरई के पास डीसीएम में हीरालाल की मौत हो गई।
रविवार रात लगभग एक बजे उन्नाव के अजगैन थाना क्षेत्र में नवाबगंज टोल प्लाजा पर पुलिस ने डीसीएम रोकी तो उसमें 26 लोगों के साथ एक शव मिला। एसडीएम प्रदीप कुमार वर्मा व सीओ कृपाशंकर ने मौके पर पहुंचकर डीसीएम सवार लोगों से पूछताछ की और मेडिकल टीम से सभी की जांच करा शव वाहन से मृतक व उसके परिवार के दो लोगों गोरखपुर भेजा, जबकि अन्य को रोडवेज से भेजा गया। गोरखपुर पहुंचने पर मृतक के परिजनों का सैंपल लिया गया। जिसमें दो की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर वहां के सीएमओ ने उन्नाव जिला प्रशासन को इसकी जानकारी दी। डीसीएम से शव उतरवाने और श्रमिकों को रोडवेज बस में बैठाने में मददगार बने अजगैन थाना के अपराध निरीक्षक, नवाबगंज चौकी प्रभारी समेत थाना के 15 पुलिस कर्मियों को सोहरामऊ के सरस्वती मेडिकल कॉलेज में आइसोलेट किया गया है। सभी का सैंपल लेकर जांच को भेजा गया है। एसपी विक्रांतवीर ने बताया कि सैंपल रिपोर्ट का इंतजार है।
रविवार को डीसीएम में शव मिलने की सूचना पर एसडीएम प्रदीप वर्मा और सीओ हसनगंज कृपाशंकर भी मौके पर पहुंचे थे। डीसीएम मेें कोराना संदिग्ध की मौत की बात सामने आने के बाद भी अधिकारियों ने बला टालने के लिए सभी को बिना आइसोलेट करा गोरखपुर भेज दिया। एसडीएम प्रदीप वर्मा ने बताया कि गोरखपुर भेजने से पहले डीसीएम में बैठे सभी लोगों की मेडिकल टीम से जांच कराई गई। इसके बाद ही सभी को भेजा गया।
मुंबई से 27 लोगों को गोरखपुर छोड़ने जा रहे डीसीएम के चालक व क्लीनर पर सोशल डिस्टेंसिंग व लॉकडाउन के उल्लंघन की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने दोनों को सरस्वती मेडिकल कॉलेज में आइसोलेट कराया था। दोनों का सैंपल लेकर जांच को भेजा गया था। मंगलवार को दोनों की रिपोर्ट निगेटिव आने की सूचना मिलने पर प्रशासन ने राहत की सांस ली।