टीम की सभापति ने महिला बंदियों से मिलकर जेल की सुविधाओं की हकीकत जानी। उनके बच्चों के खानपान, इलाज व टीकाकरण के बारे में भी पूछा। लगभग दो घंटे के निरीक्षण के बाद बाहर निकली टीम की सभापति जेल की व्यवस्था से संतुष्ट दिखी। उन्होंने बताया कि यह उनका रोटीन निरीक्षण है। एडीजी व डीआईजी जेल उनके साथ रहे। इससे पहले उन्होंने सोहरामऊ के मॉडल स्कूल का भी निरीक्षण किया।
शुक्रवार दोपहर लखनऊ से महिला एवं बाल विकास समिति की सभापति आशा किशोर टीम के साथ जिले की हकीकत जानने निकली। वह सोहरामऊ के मॉडल बने प्राथमिक विद्यालय जाकर शिक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। यहां पर उन्हे शिक्षा व्यवस्था तो ठीक मिली लेकिन स्कूल की फर्स और शौचालय खराब मिला। जानकारी करने पर उन्हें बताया गया कि मरम्मत के लिए प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया है। पैसा मिलते ही काम शुरू करा दिया जाएगा। यहां से निकलने के बाद वह जेल पहुंची। यहां पहले से ही एडीजी डीएस चौहान व डीआईजी जेल उनकी अगुवाई के लिए मौजूद थे। मैडम के पहुंचते ही दोनों अधिकारी उन्हें जेल ले गए। जेल में उन्होंने महिला बंदियों से पूछताछ की और उनके बच्चों को दुलराया भी। बच्चों के लिए वह बिस्किट, फल व कपड़े लाई थी। जो सभी को वितरित किए। महिला बंदियों से बातचीत कर उन्होंने जेल से मिलने वाली सुविधाओं की हकीकत जानी। महिला बंदियों के बच्चों के इलाज, खानपान, टीकाकरण का भी जायजा लिया। निरीक्षण के बाद जेल गेट से बाहर निकली सभापति आशा किशोर ने बताया कि यह उनका रोटीन निरीक्षण है। जेल में महिला कैदियों को किस स्तर की सुविधा मिल रही है। इसकी जांच की गई। जांच में सब कुछ समान्य मिला। उन्होंने बताया कि बंदी महिलाओं और उनके बच्चों के लिए जेल में आरओ के पानी की व्यवस्था भी कर ली गई है। जेल से निरीक्षण के बाद वह मगरवारा स्थित पोषाहार फैक्ट्री पहुंची। जहां उन्हें सब ठीक मिला।
इनसेट।
परमीशन लेकर अधिकारी जेल में ले गए मोबाइल
तीन दिन पहले डीएम और एसपी जेल का निरीक्षण करने पहुंची। यहां अधिकारियों ने मोबाइल से जेल के अंदर की फोटो खींचकर वायरल की। मोबाइल लेकर अधिकारियों के जेल के अंदर जाने और फोटो खींचकर वायरन करने की बात जब एडीजी डीएस चौहान से पूंछी गई तो वह बोले कि परमीशन लेने के बाद मोबाइल लेकर जाया जा सकता है। अधिकारियों ने इसके लिए परमीशन ली थी। फोटो खींचकर वायरल करने की बात को वह नजरअंदाज कर गए।
इनसेट।
बंदी रक्षक की पीड़ा को किया नजर अंदाज
छिबरामऊ कन्नौज के हाथिम गांव निवासी किशनपाल गौतम उन्नाव जिला जेल में बंदी रक्षक तैनात है। उसने बताया कि उसके बेटे को ब्लड कैंसर है। इलाज के लिए यहां के अधिकारियों से 20 दिन से छुट्टी मांग रहा हूं पर कोई छुट्टी देने को तैयार नहीं है। बेटे को सही इलाज न मिला तो उसके साथ कोई भी अनहोनी हो सकती है। एडीजी व डीआईजी से जब इस बंदी रक्षक की पीड़ा के बारे में पूछा गया तो वह इस बात को नजर अंदाज करते नजर आए। बोले ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली। जबकि रात्रि ड्यूटी निपटाने के बाद खुद बंदी रक्षक उनसे मिलने के लिए घंटो जेल परिसर के चक्कर काटता रहा।
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