फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अफरातफरी के बीच पोलिंग पार्र्टियां रवाना

Sun, 19 Feb 2017 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
विज्ञापन
carrying evm - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
विधानसभा चुनाव 2017 के लिए रविवार को मतदान होना है। शनिवार को दोस्तीनगर प्रशिक्षण केंद्र से पोलिंग पार्टियों को बूथाें के लिए रवाना किया गया। यहां पर अव्यवस्थाओं की भरमार रही। कार्मिकों को पेयजल के लिए तरसना पड़ा। विधानसभावार काउंटर अलग-अलग जगहों पर बनाए गए थे। इनके बीच दूसरी इतनी अधिक थी कि कार्मिकों को मैदान के एक छोर पर ड्यूटी लेटर लेने जाना पड़ रहा था तो दूसरी कोने पर जाकर ईवीएम लेनी पड़ी। वहीं वाहन पर सवार होने के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ी। इसके अलावा नेटवर्क जाम होने से कार्मिकों का फोन से संपर्क नहीं हो पाया। प्रथम मतदान अधिकारी पीठासीन अधिकारी को ढूढ़ रहा था तो द्वितीय प्रथम को। पीठासीन अधिकारी को अपनी टीम इकट्ठा करने में काफी मशक्कत करना पड़ी। कार्मिक इधर-उधर भटक रहे थे और जिम्मेदार उन्हें एक कोने से दूसरे कोने भेज रहे थे। अधिकारियों व कार्मिकों के सिर ढकने के लिए जो टेंट लगाया गया था वह भी नाकाफी था। सदर विधानसभा क्षेत्र के सथरा पोलिंगबूथ में पहले जिसे पीठासीन अधिकारी बनाया गया था उसकी ड्यूटी कट गई। बाद में रामबहादुर सिंह को पीठासीन बनाया गया। उन्हें लिए बगैर ही गाड़ी चली गई। इस पर वह एसडीएम सदर के पास पहुंचे तो उन्होंने तत्काल दूसरे वाहन से भेजा गया।
विज्ञापन

नेटवर्क ने भी नहीं दिया साथ
प्रशिक्षण केंद्र पर लोड बढ़ने से अचानक बीएसएनएल का नेटवर्क धड़ाम हो गया। इससे उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। जिन मतदान कार्मिकों व अधिकारियों के पास बीएसएनएल के सिम थे उनका एक दूसरे से घंटों संपर्क नहीं हो सका। मोबाइल खिलौने बने रहे। इसके चलते भी केंद्र पर घंटों अफरातफरी मची रही।
चुनाव ड्यूटी कटवाने की रही होड़
चुनाव ड्यूटी से कैसे बचा जा सके इसके लिए कई मतदान कर्मियों ने संबंधित अधिकारियों के पास नेताओं व पहुंच वालों से फोन कराए। कुछ ऐसे भी कार्मिक थे जिनकी ड्यूटीपत्र पहले ही जमा हो गई थी। उनकी ड्यूटी मौके पर काट दी गई। अगिभनशमन प्रशिक्षण केंद्र पर सुबह से ही चुनाव ड्यूटी कटवाने वालों का मजमा लगा हुआ था। यह कार्मिक डीएम व सीडीओ के पीछे-पीछे लगे रहे। कोई छोटे बच्चे होने की दुहाई दे रहा था तो कोई बीमारी के कागज हाथ में लिए था। इतना ही नहीं ड्यूटी कटवाने के लिए कुछ नेताओं के फोन भी संबंधित अधिकारियों के पास आए। कुछ ऐसे मतदान कर्मियों की ड्यूटी काटी गई जिन्होंने हस्ताक्षर भी कर दिए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें