जवाहर नवोदय विद्यालय विद्यालय में छात्र-छात्राएं बुखार से पीड़ित हैं। छात्र-छात्राओं का पहले स्कूल में ही इलाज किया गया। बाद में नौ छात्राओं को तेज बुखार आने पर उन्हें सफीपुर सीएचसी में भर्ती कराया गया। दोपहर तक इलाज चलने के बाद छात्राओं को स्कूल भेज दिया गया।
जवाहर नवोदय विद्यालय में वायरल फीवर फैला हुआ है। बुखार के साथ ही बच्चों को जुखान में उल्टियां भी हो रही हैं। शुक्रवार से बीमार बच्चों का इलाज स्कूल में ही दवाओं को देकर चल रहा था। छात्र-छात्राओं में आशीष(17)पुत्र कमलेश, अंजली(10)पुत्र अरविंद, अनिरूद्ध(13)पुत्र सुरेंद्र, अर्पिता(11)पुत्र सखदेव, सुखदेई(13) पुत्री राघवराज, अवधेश(12) पुत्र भगवती प्रसाद, शुभांगी(10)पुत्र सुबोध व जान्हवी(16)पुत्री संजीव को तेज बुखार व उल्टियां शुरू होने पर उन्हें सफीपुर सीएचसी में लाकर भर्ती कराया गया। दोपहर तक बच्चों का इलाज चला। उसके बाद उन्हें घर भेज दिया गया। स्कूल के अंदर कितने छात्र-छात्राएं बीमार हैं यह स्कूल प्रशासन छुपा रहा है। स्कूल के प्रधानाचार्य राजेंद्र कसर से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि मैं अभी महाराष्ट्र में हूं। छह सात बच्चों को वायरल फीवर हुआ था। उनका इलाल सीएचसी में कराया गया है। इस स्कूल में कक्षा छह से बारह तक कि कक्षाआें का संचालन होता है। स्कूल का अन्य स्टाफ भी बोलने को कुछ तैयार नहीं है। आवासीय स्कूल में छात्र-छात्राओं के बीमार होने का कोई पहला मामला नहीं है। इसके पहले कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल में भी बच्चियां बीमार हो सकती हैं।
इसके पहले भी छात्राएं हो चुकी हैं बीमार
6 सितंबर को सफीपुर सीएचसी में आठ छात्राएं भी उल्टी दस्त आने पर बीमार हो चुकी हैं। छात्र-छात्राओं को फफूंदी लगा खाना खिलाया गया था।
2 सितंबर को गंजमुरादाबाद कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल में 24 छात्राएं वायरल फीवर की चपेट में आई थीं। जानकारी मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्कूल जाकर बच्चों की स्लाइड बनाई थी। इसके साथ ही छात्राओं को दवाएं दी गई थीं। अब वहां की छात्राओं की हालत में सुधार है।
5 अगस्त को हसनगंज कस्तूरबा में 30 छात्राएं फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो चुकी हैं। खाना खाने के बाद छात्राओं में उल्टी दस्त शुरू हुए थे। छात्राओं को हसनगंज सीएचसी में भर्ती कराया गया था। विद्यालय स्टाफ की लापरवाही देखते हुए तत्कालीन डीएम सौम्या अग्रवाल ने वार्डेन व फुल टाइम टीचर पर कार्रवाई करते हुए उनका विद्यालय बदला था लेकिन आज तक वार्डेन ने अपना विद्यालय नहीं छोड़ा।