उन्नाव। शहर वासियों को शुद्ध पेयजल देने के लिए 264 करोड़ की अमृत योजना में जगह-जगह भ्रष्टाचार के फव्वारे फूट रहे हैं। टेस्टिंग में लाइन दो महीने में 28 जगह लीकेज हुई है। जल निगम ने 10 में सात जोन काम पूरा होने की रिपोर्ट लगा, नगर पालिका को हस्तांतरण के लिए फाइल भेजी। पालिका ने फाइल लौटा दी। करोड़ों की योजना दो विभागों के बीच फंसी है और शहरियों को अमृत नहीं मिल पा रहा है। समीक्षा बैठक में डीएम ने एडीएम की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम बनाकर जांच और सुधार कराने के निर्देश दिए हैं। पहले चरण में 15 दिन में चार जोन की कमियां दूर कर हस्तांतरण कराने को कहा है।
मालूम हो कि शहर के सभी 32 वार्डों के 30,298 घरों में नल से शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए वर्ष 2018 में 264 करोड़ की योजना मंजूर हुई थी। गंगा नदी के पानी को वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में साफ करके हर घर तक जलापूर्ति करनी है, लेकिन बार-बार समय सीमा बढ़ती रही और शहर वासियों को अमृत नहीं मिल पाया।
छह साल से बन रही अटल मिशन आफ रेजूवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) योजना के लिए 12वीं बार समय सीमा बढ़ाई गई, लेकिन फिर भी यह योजना शहर वासियों को पानी नहीं दे पाई। जल निगम का दावा है कि 10 में से सात जोन की टेस्टिंग पूरी हो गई है और तीन में अंतिम चरण का काम चल रहा है।
जल निगम ने सात जोन हस्तांतरित करने के लिए नगर पालिका को फाइल भी भेजी लेकिन पाइप लाइनों में टूट-फूट और लीकेज खत्म न होने तक परियोजना की जिम्मेदारी लेने से इन्कार करते हुए फाइल लौटा दी है। मामले की जानकारी पर डीएम गौरांग ने एडीएम न्यायिक अमिताभ यादव की अगुवाई में चार सदस्यीय टीम बनाई है। इसमें लघु सिंचाई के एई, एक्सईएन जल निगम नगर पालिका के ईओ व जेई शामिल हैं। यह टीम पहले चरण में चार जोन का निरीक्षण करके खामियों का सुधार कराएगी। डीएम ने 15 दिन में चार जोन दुरुस्त करने और हस्तांतरित कराने का निर्देश दिया है।
12.40 करोड़ जुर्माना भी लग चुका है
पेयजल की इस योजना में लगातार देरी और गड़बड़ी पर जल निगम ने निर्माण एजेंसी पर तीन बार जुर्माना की कार्रवाई की। सितंबर 2024 में लेटलतीफी पर 5.90 करोड़ रुपये जुर्माना लगा। खोदी गई सड़कों की मरम्मत न कराने व जिला प्रशासन को गलत रिपोर्ट देने पर जून 2023 में एक करोड़ रुपये और फिर लेटलतीफी को लेकर 21 नवंबर 2023 को 5.50 करोड़ रुपये जुर्माना लगा था। इसके बाद भी लापरवाही जारी है।
भूमिगत पाइप लाइनों में अक्सर कहीं न कहीं लीकेज होता है। पूरी तरह टेस्टिंग और कुछ महीने तक निर्बाध जलापूर्ति होने के बाद ही अमृत योजना की जिम्मेदारी ली जाएगी। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह परियोजना खर्चीली साबित हो रही है और नगर पालिका के पास इतना बजट नहीं होता। जलनिगम, छह महीने इसका खुद संचालन करे, सुचारु रूप से चलने पर पालिका इस परियोजना की जिम्मेदारी लेगी।
श्वेता मिश्रा, नगर पालिका अध्यक्ष
जल निगम की निर्माण एजेंसी एक साल से टेस्टिंग ही कर रहा है। कहीं भी जलापूर्ति सही तरीके से शुरू नहीं हो सकी है। शहर की जलापूर्ति व्यवस्था नगर पालिका के 24 ट्यूबवेलों के माध्यम से की जा रही है। परियोजना की जिम्मेदारी तभी ली जाएगी जब सुनिश्चित हो जाएगा कि कोई गड़बड़ी नहीं है।
विवेक वर्मा, जेई नगर पालिका
शहर के 10 में सात जोन पूरे हो चुके हैं। रोज एक बार पानी का पूरा प्रेशर डाल कर टेस्टिंग भी की जाती है। जहां भी समस्या आई उसे ठीक करा दिया गया है। इन सात जोन में कोई समस्या नहीं है। तीन जोन में टेस्टिंग का काम चल रहा है। वह भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
पंकज रंजन झा, एक्सईएन जल निगम