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श्रमिक की मौत पर हंगामा

Tue, 20 Jun 2017 12:29 AM IST
अमर उजाला उन्नाव
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हंगामा करते मृतक के परिजन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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हाईवे पर पीडब्ल्यूडी की गाड़ी से कुचलकर फैक्ट्री श्रमिक की मौत के दूसरे दिन परिजनों हंगामा किया। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे श्रमिकों ने शव लेकर फैक्ट्री पहुंचे और गेट पर हंगामा शुरू कर दिया। फैक्ट्री संचालक ने मृतक आश्रित को 3.10 लाख रुपये देने का आश्वासन दिया तो हंगामा शांत हुआ। उधर पुलिस ने सरकारी बोलेरो कब्जे में लेकर रिपोर्ट दर्ज की है।
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मालूम हो कि रविवार शाम लखनऊ से कानपुर की ओर जा रही तेज रफ्तार बोलेरो ने रोडवेज वर्कशाप मोड़ के पास शहर के मोहल्ला कल्याणीदेवी खजुरिया बाग निवासी साइकिल से घर जा रहे इनायती फुट वियर फैक्ट्री के श्रमिक संदीप सविता को टक्कर मार दी थी। बोलेरो में सवार लोगों ने भागने का प्रयास किया लेकिन लोगों की भीड़ अधिक होने से सफल नहीं हो पाए। बाद में घायल का इलाज कराने की बात कहकर दूसरी गाड़ी से लेकर गए और जिला अस्पताल में भर्ती कराकर भाग निकले। करीब तीन घंटे बाद सूचना पर परिजन पहुंचे तो डाक्टरों ने संदीप की हालत गंभीर होने और कानपुर ले जाने की सलाह दी। परिजन उसे कानपुर लेकर जा रहे थे तभी उसकी मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और सरकारी बोलेरो को कब्जे में लेकर रिपोर्ट दर्ज की।


श्रमिक की मौत की सूचना पर पोस्टमार्टम हाउस में सुबह से ही श्रमिकों का जमावड़ा रहा। फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से किसी के पोस्टमार्टम हाउस न पहुंचने से श्रमिक व परिजनों में आक्रोश रहा। पीएम हाउस में भी कई बार नारेबाजी की। शव का पोस्टमार्टम होने के बाद शव लेकर फैक्ट्री पहुंच गए। शव को गेट पर रखकर नारेबाजी शुरू कर दी। काफी देर तक सुनवाई न होने पर लोगों ने सदर विधायक को फोन कर जानकारी दी। इसके बाद विधायक प्रतिनिधि के नीरज गुप्ता ने फैक्ट्री प्रबंधन से बात की इसके बाद प्रबंधन ने मृतक की पत्नी शीला को 3.10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता की बात कही। प्रबंधन ने 30 हजार रुपये नगद और बाकी रुपये मंगलवार को चेक या ड्राफ्ट के माध्यम से देने का वादा किया। इसके बाद परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए लेकर गए। परिजनों ने बताया कि मृतक दो भाइयों में छोटा था। उसके दो साल का बेटा प्रिंस भी है।
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मृतक के परिजनों में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को लेकर भी आक्रोश है। मृतक के पिता मुनेश्वर के अनुसार घटना के समय गाड़ी लोनिवि का सरकारी चालक चला रहा था और उसमें एक जेई के अलावा कुछ अन्य लोग भी बैठे थे। उन्होंने बताया कि अगर अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों ने घायल का सही तरीके से इलाज कराया होता या समय से घर सूचना भिजवा देते तो शायद संदीप की जान बच जाती।
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