उन्नाव। नगर पालिका का जलकल विभाग ओवरहेड टैंकों की समय पर सफाई न कराकर शहरवासियों की सेहत से खिलवाड़ कर रहा है। आलम यह है कि ओवरहेड टैंकों (पानी की टंकियों) की चार सालों से सफाई नहीं कराई गई है। इसकी हकीकत खुद टंकियों पर लिखी तारीखें बयां कर रही हैं। ऐसे में दूषित जलापूर्ति से शहरवासियों के बीमार होने का खतरा बढ़ गया है।
शहर के करीब तीन लाख लोगों को साफ पानी देने के उद्देश्य से नगर पालिका क्षेत्र में नौ ओवरहेड टैंक और 20 ट्यूबवेल हैं। टंकियों की सफाई नगर पालिका के जलकल विभाग के जिम्मे है। वर्षों से सफाई न होने से टैंकों में काई जम गई है, जो पाइप लाइनों से होकर लोगों के घरों तक पहुंचती है। मौहारीबाग टंकी पर लिखी सफाई की तारीख 11 नवंबर 2020 है। आवास विकास-ए ब्लाक स्थित टंकी की सफाई 16 मई 2020 को हुई थी।
इसी प्रकार पन्नालाल पार्क, अब्बासबाग, कांशीराम कालोनी, एबी नगर, पीडी नगर की टंकियों की भी सफाई सालों से नहीं हुई है। यहां तैनात कर्मचारी ने बताया कि टंकी की मरम्मत या नई टंकी का निर्माण कराने की मांग की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि नगर पालिका कर्मी सिर्फ सफाई की तारीख लिखकर चले जाते हैं। दूषित जलापूर्ति से बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। लोग पानी के गैलन खरीद कर प्यास बुझा रहे हैं। जिला अस्पताल में दूषित पानी पीकर डायरिया की चपेट में आने वाले मरीज बढ़ गए हैं। रोजाना औसतन 10 मरीज जिला अस्पताल पहुंचते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि दूषित पानी के प्रयोग से डायरिया सहित पेट की अन्य बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है।
नलकूपों में लगे क्लोरिनेशन सिस्टम फेल
पानी की दूषित होने से रोकने के लिए ओवरहेड टैंकों के पानी में क्लोरीन मिलाया जाता है। इस पर हर महीने नगर पालिका 40 हजार रुपये खर्च करती है। यह क्लोरीन नलकूपों में लगे क्लोरिनेशन पंप के जरिये मुख्य पाइप लाइन में जाता है। इससे पानी में विषाणु नहीं पनपते हैं। लेकिन अधिकांश ट्यूबवेलों से सीधे जलापूर्ति की जाती है। शहर के सिविल लाइंस क्षेत्र को जलापूर्ति करने वाले मौहारी बाग सहित सभी में क्लोरिनेशन पंप खराब पड़े हैं। ऐसे में बिना क्लोरीन के पेयजल आपूर्ति की जा रही है। यह पानी पीने से डायरिया, पीलिया जैसी संक्रामक बीमारियों का खतरा है।
शहर के दीपक त्रिवेदी ने बताया कि नगर पालिका कर्मचारी टंकी की सफाई नहीं करते हैं। केवल सफाई की तारीख लिखकर चले जाते हैं। यह कई साल से चल रहा है और जिम्मेदार इस पर ध्यान नहीं दे रहे।
संजीव शुक्ला ने बताया कि घरों में गंदा और बदबूदार पानी पहुंच रहा है जो पीने लायक नहीं रहता। इससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है। जलापूर्ति ज्यादा खराब होने पर खरीदकर पीना पड़ता है।
बोले जिम्मेदार
ओवरहेड टैंकों की सफाई साल में दो बार कराई जाती है। इस साल जुलाई में सफाई कार्य हुआ था। जिन टंकियों में पुरानी तारीख लिखी है, उनकी जांच कराई जाएगी। पानी का सैंपल भी जांच के लिए भेजा जाएगा। अगर कमी मिलती है तो टंकी की दोबारा सफाई कराएंगे।
- विवेक वर्मा, जलकल अभियंता