उन्नाव। एक जनवरी से नर्सिंग होम की लाइसेंस प्रक्रिया बदल जाएगी। डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी विधिवत जांच करने के बाद ही लाइसेंस स्वीकृत और संचालन की अनुमति देगी। जिस अस्पताल में इलाज की जितनी सुविधा होगी उसी के अनुसार उसे स्वास्थ्य सेवा का लाइसेंस दिया जाएगा। अस्पताल के डाक्टरों का पैनल बदलने से पहले स्वीकृति लेनी होगी। बिना सूचना बदलाव करने पर लाइसेंस निरस्त हो जाएगा। संचालक को ऑनलाइन आवेदन और फीस जमा करनी होगी।
निजी अस्पताल खोलने के नियमों में सरकार ने लाइसेंस प्रक्रिया में बदलाव किए हैं। नए नर्सिंगहोम के लिए लाइसेंस स्वीकृत करना हो या पुराने का नवीनीकरण, ऑनलाइन आवेदन करना होगा। शासन से निर्धारित फीस ऑनलाइन जमा करने के बाद डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी बिल्डिंग, ऑपरेशन थियेटर, प्रदूषण, अग्निशमन की व्यवस्था और मेडिकल कचरा निस्तारण के मानकों की जांच करेगी। अस्पताल के पैनल और स्टॉफ की हकीकत जांचने के बाद साधारण इलाज, आपरेशन वाले मरीजों को भर्ती करने की सुविधा या ट्रामा सेंटर जैसी व्यवस्था होगी उसी के अनुसार डीएम अनुमति देते हुए लाइसेंस स्वीकृत करेंगे।
सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश ने बताया कि एक जनवरी से नई प्रक्रिया शुरू होगी। कमेटी में डीएम, सीएमओ सहित अन्य विभागों के दो सदस्य शामिल होंगे। शासन से निर्धारित फीस भी जमा करनी होगी। अब डीएम की अनुमति पर नर्सिंगहोम को खोला व बंद किया जा सकेगा।
जिले में नए नर्सिंग होम खोलने के लिए जिले में 28 लोगाें ने सीएमओ के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर रखा है। सीएमओ को इन नर्सिंगहोम में मानकों की जांच करानी है। यह फाइलें पिछले एक महीने से लंबित हैं। अब नई प्रक्रिया शुरू होेने की जानकारी के बाद इसमें तेजी आई है। ताकि जल्द इन्हें अनुमति दी जा सके।