ओपीडी में बच्चे का चेकअप करते बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ब्रज कुमार। संवाद
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उन्नाव। जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ रही। ओपीडी, दवा और पर्चा काउंटर पर धक्कामुक्की होती रही। भीड़ अधिक होने से मरीजों को डॉक्टर को दिखाने और जांच कराने के लिए काफी देर इंतजार करना पड़ा। महिला अस्पताल में भी जांच कराने वालों की भीड़ रही। कोविड नियमों की अनदेखी हर जगह दिखी।
ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के लिए सुबह आठ बजे से ही भीड़ जुटने लगी थी। दोपहर दो बजे तक फिजीशियन डॉ. कौशलेंद्र प्रकाश के पास 98 व दूसरे फिजीशियन डॉ. वैभव त्रिपाठी ने 30 मरीज देखे। बुखार व डायरिया के 30 मरीज चिह्नित हुए। बुखार पीड़ितों में गिरजाबाग के पीसी सक्सेना (68) व डायरिया पीड़ितों में दही चौकी की शैमुन्निशा (60), ईदगाह की रश्मि (60), शेरअलीखेड़ा के शिवा (7), शुक्लागंज की पिंकी (24), पुरवा के टीकर की जाह्न्वी (4) और कासिम नगर की डेढ़ वर्षीय तश्मिया को जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया।
दिन और रात के मौसम में उतार व चढ़ाव का असर सबसे अधिक बच्चों पर पड़ रहा है। सोमवार को बाल रोग विशेषज्ञ ने ओपीडी में 184 बच्चों को देखा। डॉ. बृज कुमार ने बताया कि रात के समय मौसम ठंडा होने से बच्चों में सर्दी, खांसी, जुकाम, उल्टी दस्त व निमोनिया के शुरुआती लक्षण पाए जा रहे हैं। बच्चों का अधिक ध्यान रखने की जरूरत है।
डॉ. ब्रज कुमार ने बताया कि छह माह तक के बच्चों को मां का दूध पिलाने के साथ ही उन्हें गर्म कपड़े पहनाए रखें। स्तनपान कराने वाली माताओं को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्हें सर्दी लगने पर बच्चे को भी परेशानी हो सकती है।
कोविड नियमों का पालन करने की गाइड लाइन जारी है। वार्डों में चौबीस घंटे अनाउंसमेंट भी कराया जा रहा है। ताकि लोग जागरूक हों। डॉक्टर भी मरीजों को समझाते हैं, लेकिन वह नहीं मानते। अब कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
-डॉ. पवन कुमार, सीएमएस