उन्नाव। कोरोना किट खरीदारी में गड़बड़झाले के अंदेशे पर दो स्तर पर जांच टीम गठित कर दी गई है। शासन के आदेश पर पंचायतीराज निदेशक ने जहां मंडलीय कंसल्टेंट को जांच सौंपी है। वहीं, जिलेस्तर पर सीडीओ ने बीडीओ व एडीओ पंचायत से रिपोर्ट तलब की है।
कोरोना संक्रमण के समय ग्राम पंचायतों को कोरोना किट (पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर) खरीदने के आदेश दिए गए थे। शासन से इसकी कीमत 2800 रुपये निर्धारित की गई थी। हालांकि कई ग्राम पंचायतों में इस कीमत से दो से तीन गुनी कीमत पर किट की खरीदारी की गई। बीघापुर की कई ग्राम पंचायतों में तो 8 हजार से अधिक कीमत पर भुगतान किया गया है। कमोबेश यही हाल नवाबगंज व असोहा ब्लॉक की ग्राम पंचायतों का रहा है। हालांकि अब प्रधान व सचिव भुगतान न किए जाने की बात कहकर अपना बचाव कर रहे हैं।
उधर, जब सुल्तानपुर और गाजीपुर में मामला खुला और पंचायतराज अधिकारियों पर कार्रवाई हुई तो स्थानीय स्तर पर अधिकारियों में हड़कंप मचा। अब शासन के मामले में कड़ा रुख अख्तियार करने के बाद मुख्यालय के साथ-साथ जिलेस्तर पर भी जांच की तैयारी की गई है। प्रदेश सरकार के कड़े आदेश के बाद निदेशक पंचायतीराज एके सिंह ने मंडलीय कंसल्टेंट मनीष मिश्रा को मामले की जांच दी है। जांच अधिकारी आज उन्नाव आकर जांच कर सकते हैं। निदेशक ने जांच अधिकारी को आवश्यक प्रपत्र देकर सहयोग करने का निर्देश स्थानीय अधिकारियों को दिए हैं। उधर, डीएम रवींद्र कुमार ने मामले को गंभीरता से लिया और सीडीओ से जांच रिपोर्ट तलब की।
सीडीओ डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने बीडीओ व एडीओ पंचायत को पत्र जारी करके निर्देश दिए हैं कि वह अपने विकासखंड की ग्राम पंचायतों में कोरोना किट की खरीदारी की प्रक्रिया एवं क्रय किए जाने के पूरे मामले की जांच करके डीपीआरओ को रिपोर्ट दें। हालांकि सीडीओ द्वारा बीडीओ व एडीओ पंचायत को जांच दिए जाने पर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों का कहना है कि जो अधिकारी खरीद प्रक्रिया में प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहे उन्हें ही जांच देकर अधिकारियों ने कोरम पूरा करने का प्रयास किया है।