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फसल पर आफत बन गिरे ओले, किसान परेशान

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सफीपुर में ओलावृष्टि से खराब हुई आलू की फसलें। - फोटो : UNNAO
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उन्नाव। बारिश के साथ गुरुवार रात हुई ओलावृष्टि से रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं, सरसों व आलू को तगड़ा नुकसान पहुंचाया है। ओलावृष्टि से सफीपुर व बीघापुर तहसील के किसान ज्यादा प्रभावित हुए हैं। उपकृषि निदेशक ने दैवीय आपदा से हुए नुकसान की सूचना बीमा कंपनी इफको टोकियो को देकर प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे करने का निर्देश दिया है। सफीपुर तहसील में 12, सदर में 16, पुरवा में 2 मिली मीटर बारिश हुई।
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गुरुवार शाम 7 बजे के बाद हुई बारिश के दौरान सफीपुर व बीघापुर तहसील क्षेत्र के दर्जनों गांवों में तगड़ी ओलावृष्टि भी हुई थी। ओले गिरने से सफीपुर के ग्राम गहोली, सकहन सराय, जमालनगर व परियर आदि गांवों में लाही व आलू की फसलें बर्बाद हो गई थीं। इसके अलावा बीघापुर तहसील क्षेत्र के गोसाईखेड़ा, अजीतिखेड़ा, महेशखेड़ा, पनई बुजुर्ग, विजईखेड़ा, जंगलबुजुर्ग, हमीरपुर, गोबरहा समेत अन्य गांवों में भी ओलावृष्टि से गेहूं की भी फसल को नुकसान पहुंचा है। प्रकृति की इस मार से किसान परेशान हुए। किसानों का कहना है कि ओलावृष्टि से फसलों को तगड़ा नुकसान पहुंचा है। उधर, एसडीएम दयाशंकर पाठक ने ओलावृष्टि से किसी प्रकार का नुकसान होने से इंकार किया है। उपकृषि निदेशक डॉ. नंदकिशोर ने बताया कि बीघापुर में सबसे ज्यादा नुकसान होने की सूचना मिली है। इसके लिए बीमा कंपनी इफको टोकियो के जिला प्रबंधक से सर्वे करने को कहा गया है। इफको टोकियो के जिला प्रबंधक श्यामू जायसवाल ने बताया कि शनिवार को वह प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे करेंगे। सर्वे के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
बीमा कंपनी इफको टोकियो के जिला प्रबंधक श्यामू जायसवाल ने बताया कि ओलावृष्टि समेत अन्य दैवीय आपदा से नुकसान की स्थिति में बीमित किसान कंपनी के टोलफ्री नंबर 18001035490 पर फोन करके सूचना दे सकता है। किसान को अपना नाम, गांव, पंचायत और फसल का नाम व नुकसान के कारण की जानकारी देनी होगी। इसके बाद सर्वेक्षण कराते हुए नुकसान का आकलन कर क्षतिपूर्ति प्रदान की जाएगी। प्रभावित किसान विकास भवन स्थित जिला कृषि अधिकारी कार्यालय, उपकृषि निदेशक कार्यालय या नजदीक के राजकीय कृषि भंडार गृहों में जाकर भी नुकसान की लिखित सूचना दे सकते हैं।
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जिला कृषि रक्षा अधिकारी विकास शुक्ला ने बताया कि छिटपुट वर्षा एवं तापमान में तेजी से गिरावट के कारण वातावरण में आर्द्रता बढ़ गई है जिससे फसलों में रोग लगने की संभावना बढ़ गई है। गेहूं में पीली गेरूई रोग लगने का लक्षण पत्तियों पर पीले पाउडर की धारियों के रूप में दिखाई देता है। किसान प्रापीकोनाजौल 25 प्रतिशत ईसी 500 मिली मात्रा में जो 600-700 लीटर पानी में घोल कर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। राई/सरसों के बारे में बताया कि माहू एवं लीफ माइनर से बचाव के लिए एजाडिरिक्टिन (नीम ऑयल) 0.15 प्रतिशत ईसी 2.5 लीटर अथवा डाइमिथेएट 30 प्रतिशत ईसी. 01 लीटर की मात्रा को प्रति हेक्टेयर की दर से लगभग 500 पानी में घोल कर छिड़काव करना चाहिए। चना/मटर/मसूर में सेमी लूपर के नियंत्रण के लिए मैलाथियान 50 प्रतिशत ईसी. 02 लीटर मात्रा को 500-600 पानी में घोलकर प्रति हेक्टयर की दर से किसान छिड़काव करें। फ ली भेदक कीट के नियंत्रण के लिए वेसिलस थ्रूजेंसिस (बीटी) 01 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से लगभग 500 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करना चाहिए।
एस्कोकाइटा ब्लाइट (पत्ती धब्बा रोग) के लिए चने की फ सल में मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्लूपी. 02 किग्रा. अथवा कापर ऑक्सी क्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लूपी 2.5 किग्रा. मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। आलू-अगेती झुलसा रोग के बारे में बताया कि पत्तियां और कंद दोनों प्रभावित होते हैं। प्रकोप की शुरुआत में पत्तियों पर छल्ले बनते हैं जो प्रतिकूल मौसम में छल्ले आपस में मिल जाते हैं जिसे पूरी पत्ती झुलस जाती है। पछेती झुलसा आलू की पत्ती तने तथा कंद सभी भागों पर होता है। अगेती/पछेती झुलसा रोग के प्रकोप की स्थिति में कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी 2.5 किलोग्राम, मैन्कोजैव 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी. 02 किलोग्राम, जिनेव 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी. 02 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रसायनों में से किसी एक का 600-800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
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